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गोवंश संरक्षण में अब निजी कंपनियों की भागीदारी

Tue, 19 Jan 2016 12:37 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Jan 2016 12:37 PM IST
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private sector will help in progeny conservation.

उत्तराखंड की 23 गोशालाओं में रखे गए हजारों पशुओं के संरक्षण में अब सरकार सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के अलावा बड़े औद्योगिक घरानों की भी मदद लेने जा रही है।

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कारपोरेट सोशल रेसपांसिबिलिटी यानी सीएसआर के तहत कंपनियां गोशालाओं को बजट मुहैया कराएं, इसके लिए सरकार मसौदा तैयार कर रही है। पशुपालन, शहरी विकास, एवं मत्स्य पालन मंत्री प्रीतम सिंह पंवार ने सोमवार को विधानसभा स्थित सभागार में उत्तराखंड गोवंश संरक्षण को लेकर संचालित योजनाओं की समीक्षा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
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राज्य में टीएसडीसी, एनटीपीसी, ओएनजीसी और भेल के अलावा हजारों की तादात में छोटी बड़ी कंपनियां हैं, जिनका सालाना लाभ दो करोड़ से ज्यादा है। सरकार का मानना है कि यदि ये सभी कंपनियां केंद्र सरकार के प्रावधानों के तहत सीएसआर फंड से कुछ बजट मुहैया कराएं तो राज्य की गोशालाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की दिक्कत नंही आएगी।
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पशुपालन मंत्री ने बैठक में राज्य के पांच जिलों में सोसाइटी फॉर प्रिवेंट ऑफ क्रूएलिटी टूवर्ड्स एनिमल (एसपीसीए) के लिए बजट को मंजूरी दी। योजना के मुताबिक ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार के लिए 50-50 हजार रुपये, नैनीताल के लिए 40 हजार, देहरादून और टिहरी गढ़वाल के लिए 25-25 हजार रुपये के बजट को मंजूरी दी गई।

उक्त धनराशि पुलिस प्रशासन द्वारा गो तस्करों से छुड़ाए गए गोवंश को निकटवर्ती गोसदन तक पहुंचाने में परिवहन में खर्च की जाएगी। पशुपालन मंत्री ने कहा कि सीएसआर फंड के तहत जो निधि गोशालाओं को मुहैया कराई जाएगी, उसे आयकर अधिनियम की धारा 12 ए 80 सी के तहत पंजीकरण कराया जाएगा, ताकि बजट मुहैया कराने वाली कंपनियों को आयकर में छूट मिल सके।

पशुपालन मंत्री ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को गो तस्करों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया, ताकि राज्य में होने वाली गो तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


समीक्षा बैठक में निदेशक पशुपालन डॉ. कमल मेहरोत्रा, प्रभारी अधिकारी पशु कल्याण बोर्ड डॉ. आशुतोष जोशी, प्रभारी अधिकारी गोसेवा आयोग डॉ. राकेश कुमार, वरिष्ठ वित्त अधिकारी संजीव कुमार सिंह समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।

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