गिनती न सुनाने पर तीसरी कक्षा की छात्रा को बेरहमी से पीटा, प्रधानाध्यापक और शिक्षिका निलंबित
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उत्तराखंड के चंपावत विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़ाकोट में 17 मई को छात्रा की पिटाई के मामले में प्रधानाध्यापक और एक शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया है।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम रणवीर सिंह चौहान ने शिक्षा विभाग को विभागीय कार्यवाही करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) सत्यनारायण ने प्रधानाध्यापक कृष्णपाल सिंह बोहरा और शिक्षिका वंदना को निलंबित कर दिया है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़ाकोट की शिक्षिका वंदना ने 17 मई को ठीक से गिनती नहीं सुना पाने पर तीसरी कक्षा की छात्रा की बेरहमी से पिटाई कर दी थी। पिटाई से छात्रा की पीठ और पांव में बुरी तरह से घाव हो गए थे। मामले में उसके पिता ने कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया था, लेकिन डीएम के सख्त रवैये के बाद शिक्षा विभाग ने खंड शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट से जांच कराई।
पिटाई पर कार्रवाई स्पष्ट प्रावधान
जांच रिपोर्ट में पिटाई की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट में पता चला कि छात्रा की पिटाई में शिक्षिका ही नहीं, प्रधानाध्यापक भी शामिल था। छात्रा को शिक्षिका ने ज्यादा पीटा था। जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षाधिकारी ने प्रधानाध्यापक और शिक्षिका को निलंबित करते हुए दोनों को चंपावत उप शिक्षाधिकारी कार्यालय में संबद्ध कर दिया है।
निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा-17 (1) में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि बच्चों को किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड एवं मानसिक प्रताड़ना नहीं दी जाए। यदि विद्यालय प्रधानाचार्य अथवा किसी शिक्षक द्वारा किसी छात्र को शारीरिक दंड देने संबंधी आरोप सिद्ध पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ सरकारी सेवक आचरण नियमावली एवं उस पर लागू सेवा नियमावली के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।