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सीएम के फैसले से पुरोहित समाज खफा
देहरादून/ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2013 10:07 AM IST
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केदारनाथ धाम के 500 मीटर के दायरे में निर्माण को अवैध घोषित किए जाने से केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज खफा है।
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पुरोहित समाज का कहना है कि यहां बसे 850 परिवार पैतृक जमीन और घर छोड़कर कहां जाएंगे? सरकार ने तीन हफ्ते में घर तोड़ने की बात कही है, लेकिन इससे पहले यहां रह रहे पुरोहित और पंडों को क्षेत्र में ही विस्थापित करे। साथ ही केदारनाथ क्षेत्र को पिछड़ा घोषित करे।
बच्चों के लिए दून में हॉस्टल बनाएं
सरकार समाज के बच्चों की निशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था करे और दून में हॉस्टल बनाए। प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए। कहा कि केदारनाथ के लिए सरकार यदि कोई नियम बनाती है तो तीर्थ पुरोहित समाज के लोगों को विश्वास में लिया जाए।
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सोमवार को यहां श्री केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज के कार्यकारी अध्यक्ष जयप्रकाश शुक्ला ने पत्रकारों से कहा कि तीर्थ पुरोहित समाज ने केदारनाथ मंदिर की सफाई कर शीघ्र पूजा अर्चना शुरू करने की मांग की है। यदि बदरी-केदार मंदिर समिति और सरकार पूजा शुरू नहीं करा सकती तो समाज के लोगों को इसकी अनुमति दी जाए।
केदारनाथ मंदिर में एक महीना 5 दिन तक पूजा नहीं होना अशुभ है। सावन महीने में ऊंखीमठ में पूजा कराए जाने पर आपत्ति जताई। शुक्ला ने बताया कि मांगों को लेकर समाज के पदाधिकारी और पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक रविवार शाम मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मिले थे।
आपदा से भारी नुकसान
शुक्ला ने बताया कि सरकार सोनप्रयाग से होकर केदारनाथ धाम के लिए मार्ग बना रही है इससे केदारनाथ की पैदल दूरी 17 किलोमीटर हो जाने मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। सरकार को चाहिए कि वह धाम तक के लिए मोटर मार्ग का निर्माण करे। कहा कि केदारनाथ, रामबाडा, जंगलचट्टी, गौरीकुंड और लमगोंडी सहित पूरे क्षेत्र में आपदा से भारी नुकसान हुआ है। ऊखीमठ तहसील के 581 लोगों की मौत हो गई।
यात्रा ठप होने से तीर्थ पुरोहित समाज के 850 परिवारों पर बच्चों की पढ़ाई एवं आजीविका का संकट आ गया है। इस दौरान महेश शुक्ला, चंडी प्रसाद तिवारी, पशुपति नाथ, शंकर प्रसाद, किशन अवस्थी, महेश शुक्ला, उमेश पोस्ती मौजूद थे।
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