राज्य के जनसरोकारों को लेकर विभिन्न संगठनों ने चर्चा करते हुए प्रेशर ग्रुप बनाने का निर्णय लिया। जनसंघर्षों से जुड़े लोगों को साथ लेकर एक जनपक्षीय मांग पत्र बनाकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को सौंपा जाएगा। अगली बैठक आगामी अक्तूबर में होगी।
शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सलाहकार सुरेंद्र कुमार की पहल पर उनके कचहरी रोड स्थित चौपाल कार्यालय में हुई बैठक में जनसरोकारों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की थीम ‘जनसरोकारों पर बात’ रखी गई थी। समाजसेवी रतन सिंह असवाल ने कहा कि उत्तराखंड़ के पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी विकास दूर की बात है। पलायन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सेवाओं का बुरा हाल है। समाजसेवी सुरेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि हमें राजनीतिक व शासन के कार्य में लोकतंत्र की भावनाओं में एकरूपता लानी होगी। राजनीति के गिरते स्तर पर उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की। वनाधिकार आंदोलन से जुड़े प्रेम बहुखंडी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति बड़े विकास मॉडल के लिए उपयुक्त नहीं है। हमें विकास का छोटा मॉडल जैसे छोटा स्कूल, छोटा अस्पताल के साथ-साथ अपने ग्रामीण क्षेत्र की छोटी इकाइयों को प्रभावी बनाना होगा। जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को देहरादून, हरिद्वार व नैनीताल जैसे शहरों की ओर जाने के लिए मजबूर होने से बचाया जा सके। कामरेड जगदीश कुकरेती और गिरधर पंडित ने पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन व रोजगार पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। बैठक की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश उत्तराखंडी और संचालन सुरेंद्र कुमार ने किया। डॉ. एसएन सचान और डॉ. डीएन भटकोटी ने मोबाइल के माध्यम से बैठक को समर्थन दिया। बैठक में अशोक वर्मा, गोदावरी थापली, ललित पंत, नेमचंद, राजेंद्र धवन, प्रदीप डोभाल, अनिल बस्नेत, परमजीत सिंह, प्रदीप जोशी, सतीश धोलाखंडी, अब्दुल रहमान, राकेश डोभाल, मदन लाल आदि शामिल हुए।