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Dehradun News: देश में चीतों के 10 और नए ठिकाने बनाने की तैयारी
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देहरादून। देश में चीतों के 10 और नए ठिकाने बनाने की तैयारी है। ये मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में स्थित हैं। भविष्य में चीतों के लिए बनाए जाने वाले नए वास स्थलों को भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने चिह्नित किया है।
यह जानकारी डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक बिलाल हबीब ने संस्थान में आयोजित वार्षिक शोध संगोष्ठी में साझा की। ‘रेसिंग अहेड: फोर इयर्स ऑफ चीता इन इंडिया’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने बताया कि वर्ष 1947 में देश में आखिरी चीते का शिकार किया गया था। उस समय चीतों के शिकार की अनुमति थी। इसके बाद नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड में चीतों के संरक्षण को लेकर चर्चा हुई। आगामी वर्षों में इस दिशा में प्रयास किए गए।
वर्ष 2013 से 2020 तक चीतों के वास स्थल वाली साइट को लेकर अध्ययन किया गया। वर्ष 2022 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और नामीबिया से आठ चीते लाए गए। इसी वर्ष जनवरी में बोत्सवाना से भी चीते लाए गए। मौजूदा समय में देश में चीतों की संख्या 56 पहुंच गई है, जिसमें 47 शावक हैं। चीतों की संख्या बढ़ने का कारण उच्च स्तर की निगरानी और कड़ी सुरक्षा को बताया गया है।
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वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य चीतों के वास स्थल हैं। आने वाले समय में 10 और वास स्थल बनाने की योजना है। इसके लिए नौरा देवी, शाहगढ़ आदि जगहों को चिह्नित किया गया है। ये सभी जगह मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में स्थित हैं।
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विश्व में कूनो में चीता शावकों के जीवित रहने की औसत दर सर्वाधिक
वैज्ञानिक बिलाल ने संगोष्ठी में बताया कि विश्व में चीतों के शावकों के जीवित रहने की दर 40 प्रतिशत है, जबकि कूनो में यह 68 प्रतिशत है। बताया कि सात मादा चीतों ने शावकों को जन्म दिया है। इसमें पांच मादा चीतों ने एक से अधिक बार शावकों को जन्म दिया है। बताया कि कूनों में चीता सबसे अधिक चीतल का शिकार कर रहा है।
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यह जानकारी डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक बिलाल हबीब ने संस्थान में आयोजित वार्षिक शोध संगोष्ठी में साझा की। ‘रेसिंग अहेड: फोर इयर्स ऑफ चीता इन इंडिया’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने बताया कि वर्ष 1947 में देश में आखिरी चीते का शिकार किया गया था। उस समय चीतों के शिकार की अनुमति थी। इसके बाद नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड में चीतों के संरक्षण को लेकर चर्चा हुई। आगामी वर्षों में इस दिशा में प्रयास किए गए।
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वर्ष 2013 से 2020 तक चीतों के वास स्थल वाली साइट को लेकर अध्ययन किया गया। वर्ष 2022 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और नामीबिया से आठ चीते लाए गए। इसी वर्ष जनवरी में बोत्सवाना से भी चीते लाए गए। मौजूदा समय में देश में चीतों की संख्या 56 पहुंच गई है, जिसमें 47 शावक हैं। चीतों की संख्या बढ़ने का कारण उच्च स्तर की निगरानी और कड़ी सुरक्षा को बताया गया है।
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वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य चीतों के वास स्थल हैं। आने वाले समय में 10 और वास स्थल बनाने की योजना है। इसके लिए नौरा देवी, शाहगढ़ आदि जगहों को चिह्नित किया गया है। ये सभी जगह मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में स्थित हैं।
विश्व में कूनो में चीता शावकों के जीवित रहने की औसत दर सर्वाधिक
वैज्ञानिक बिलाल ने संगोष्ठी में बताया कि विश्व में चीतों के शावकों के जीवित रहने की दर 40 प्रतिशत है, जबकि कूनो में यह 68 प्रतिशत है। बताया कि सात मादा चीतों ने शावकों को जन्म दिया है। इसमें पांच मादा चीतों ने एक से अधिक बार शावकों को जन्म दिया है। बताया कि कूनों में चीता सबसे अधिक चीतल का शिकार कर रहा है।