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Dehradun News: प्रसव के लिए पड़ोसी जिले के अस्पताल पर निर्भर गर्भवती महिलाएं
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जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं राज्य गठन के 22 साल बाद भी पटरी पर नहीं आ सकी हैं। मानथात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर महिला चिकित्सक और एएनएम न होने से कारण प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को प्रसव के लिए पड़ोसी जिले के अस्पताल में ले जाना पड़ा। महिला ने बच्ची को जन्म दिया है। दोनों स्वस्थ हैं।
बीते शुक्रवार रात्रि विकासखंड चकराता अंतर्गत बोंदूर खत के दूरस्थ नाड़ा गांव निवासी महिला अंकिता (23) पत्नी अजय को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन प्राइवेट वाहन से गर्भवती महिला को किसी तरह लेकर 14 किमी दूर लाखामंडल पहुंचे। जानकारी करने पर पता चला कि नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात में न तो महिला चिकित्सक और न ही एएनएम हैं। ऐसे पर परिजन विवश नजर आए। उन्होंने जौनसार बावर जनजाति कल्याण समिति की अध्यक्षा बचना शर्मा ने संपर्क साधा। उन्होंने फोन कर उत्तरकाशी के नौगांव से 108 एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, जिसके बाद महिला को 15 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव ले जाया गया। जहां शनिवार को महिला ने बच्ची को जन्म दिया। जज्जा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। बचना शर्मा का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात से खत के करीब 5000 की आबादी निर्भर है, लेकिन यहां विशेषज्ञ महिला डॉक्टर और प्रसव से संबंधित अन्य सुविधाएं नहीं है। जिसके चलते गर्भवती महिलाओं को पड़ोसी जिले के अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर 60 किमी दूर चकराता और 80 किमी दूर विकासनगर जाना पड़ता है। कोशिश के बावजूद मुख्य चिकित्साधिकारी देहरादून डॉ. मनोज उप्रेती से बातचीत नहीं हो सकी।
108 एंबुलेंस सेवा की मांग
बचना शर्मा का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात में महिला चिकित्सक के साथ ही 108 एंबुलेंस की सुविधा होनी चाहिए, ताकि गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केंद्र एक डॉक्टर और वार्ड ब्वॉय के भरोसे संचालित हो रहा है।
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नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात में प्रसव की सुविधा न होने के चलते परिजन महिला को नौगांव के सीएचसी ले गए। स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना शासन स्तर का मामला है। - डॉ. विपिन तोमर, प्रभारी चिकित्साधिकारी, चकराता
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बीते शुक्रवार रात्रि विकासखंड चकराता अंतर्गत बोंदूर खत के दूरस्थ नाड़ा गांव निवासी महिला अंकिता (23) पत्नी अजय को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन प्राइवेट वाहन से गर्भवती महिला को किसी तरह लेकर 14 किमी दूर लाखामंडल पहुंचे। जानकारी करने पर पता चला कि नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात में न तो महिला चिकित्सक और न ही एएनएम हैं। ऐसे पर परिजन विवश नजर आए। उन्होंने जौनसार बावर जनजाति कल्याण समिति की अध्यक्षा बचना शर्मा ने संपर्क साधा। उन्होंने फोन कर उत्तरकाशी के नौगांव से 108 एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, जिसके बाद महिला को 15 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव ले जाया गया। जहां शनिवार को महिला ने बच्ची को जन्म दिया। जज्जा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। बचना शर्मा का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात से खत के करीब 5000 की आबादी निर्भर है, लेकिन यहां विशेषज्ञ महिला डॉक्टर और प्रसव से संबंधित अन्य सुविधाएं नहीं है। जिसके चलते गर्भवती महिलाओं को पड़ोसी जिले के अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर 60 किमी दूर चकराता और 80 किमी दूर विकासनगर जाना पड़ता है। कोशिश के बावजूद मुख्य चिकित्साधिकारी देहरादून डॉ. मनोज उप्रेती से बातचीत नहीं हो सकी।
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108 एंबुलेंस सेवा की मांग
बचना शर्मा का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात में महिला चिकित्सक के साथ ही 108 एंबुलेंस की सुविधा होनी चाहिए, ताकि गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केंद्र एक डॉक्टर और वार्ड ब्वॉय के भरोसे संचालित हो रहा है।
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नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानथात में प्रसव की सुविधा न होने के चलते परिजन महिला को नौगांव के सीएचसी ले गए। स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना शासन स्तर का मामला है। - डॉ. विपिन तोमर, प्रभारी चिकित्साधिकारी, चकराता