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Uttarakhand: यूपीसीएल को 1320 मेगावाट बिजली खरीद की मंजूरी मिली,  लगातार बढ़ रही मांग के बीच मिलेगी बड़ी राहत

Thu, 09 Jul 2026 01:47 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Thu, 09 Jul 2026 01:47 PM IST
सार

यूपीसीएल को 1320 मेगावाट बिजली खरीद की मंजूरी मिली है। कोयला आधारित बिजली के लिए केंद्र से लिंकेज आवंटित हो चुकी है। अब नियामक आयोग ने मंजूरी दी है। लगातार बढ़ रही मांग के बीच बड़ी राहत मिलेगी।

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Power crisis to be resolved Uttarakhand UPCL gets approval to procure 1320 MW of power
बिजली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग और बाजार पर निर्भरता के बीच यूपीसीएल के लिए राहत की खबर है। करीब दो साल से लटकी हुई कोयला आधारित 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन योजना को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत 25 साल की दीर्घ अवधि के लिए यूपीसीएल किसी कंपनी से बिजली खरीद सकेगा, जो राज्य को पूर्व से आवंटित कोयले का इस्तेमाल करेगी।

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यह बिजली आपूर्ति वित्तीय वर्ष 2030-31 से शुरू होगी। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने बुधवार को इस याचिका पर अपना अंतिम आदेश जारी किया। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की हालिया रिसोर्स एडिक्वेसी स्टडी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि यदि राज्य में बिजली खरीद या उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो उत्तराखंड में बिजली की किल्लत तेजी से बढ़ेगी।

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लिंकेज के लैप्स होने की समय-सीमा थी नजदीक
वर्तमान अनुमानों के अनुसार, बिजली की कमी वित्तीय वर्ष 2025-26 में 13 प्रतिशत (242.8 करोड़ यूनिट) से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2035-36 तक 30 प्रतिशत(919.2 करोड़ यूनिट) तक पहुंच सकती है। उपभोक्ताओं को बिना किसी कटौती के 24 घंटे निर्बाध बिजली देने और ग्रिड की सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस दीर्घकालिक बिजली खरीद को बेहद जरूरी माना गया है।
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यूपीसीएल यह बिजली टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया) के जरिये खरीदेगा। इसके लिए केंद्र सरकार की शक्ति नीति के तहत उत्तराखंड को पहले ही 1320 मेगावाट बिजली के लिए कोयला लिंकेज आवंटित किया जा चुका है। इस लिंकेज के लैप्स होने की समय-सीमा नजदीक आ रही थी, जिससे पहले इसका उपयोग करना राज्य के हित में था।

अतिरिक्त बिजली का प्रबंधन करना होगा
निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप देने और संबंधित कंपनियों के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) साइन करने से पहले यूपीसीएल को उत्तराखंड सरकार से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। आयोग ने नोट किया कि इस खरीद के बाद मानसून के तीन महीनों (जुलाई से सितंबर) में राज्य के पास जरूरत से ज्यादा बिजली (सरप्लस) होगी। यूपीसीएल को इस अतिरिक्त बिजली को बैंकिंग या व्यापार के माध्यम से सर्दियों के महीनों (दिसंबर से मार्च) में इस्तेमाल करने की पुख्ता योजना बनानी होगी। वहीं, जटिल होते बिजली ग्रिड और सौर व पंप स्टोरेज प्लांट जैसी तकनीकों के बेहतर तालमेल के लिए आयोग ने यूपीसीएल को एक स्वतंत्र और तकनीकी विशेषज्ञों से लैस पावर मैनेजमेंट ग्रुप बनाने की सलाह भी दी है।

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2040 तक 3540 करोड़ यूनिट बिजली की मांग
यूपीसीएल ने अपनी याचिका में जो तथ्य दिए थे, उस हिसाब से अगले 10 वर्षों में बिजली की मांग का अनुमान भी शामिल है। इसके तहत वर्ष 2030-31 में 2329.4 करोड़ यूनिट, 2031-32 में 2453.6 करोड़ यूनिट, 2032-33 में 2582.0 करोड़ यूनिट, 2033-34 में 2697.5 करोड़ यूनिट, 2034-35 में 2831.2 करोड़ यूनिट, 2035-36 में 2967.5 करोड़ यूनिट, 2036-37 में 3109.2 करोड़ यूनिट, 2037-38 में 3255.7 करोड़ यूनिट, 2038-39 में 3394.9 करोड़ यूनिट और 2039-40 में 3540.1 करोड़ यूनिट बिजली की मांग संभावित है। आयोग ने मांगा है कि वर्ष 2030-31 में बिजली की कमी 968 मेगावाट से बढ़कर 2038-39 में 2044 मेगावाट तक पहुंच सकती है।
 

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