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फिर दून आरटीओ के लिए पठोई की निकली ‘लाटरी’, माना था अपात्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:07 PM IST
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आरटीओ दून के पद पर तैनाती के लिए जिन तीन अधिकारियों का पैनल तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति को भेजा गया था, समिति ने उनमें से एक को भी दून आरटीओ पद के लिए पात्र नहीं माना था। समिति ने तीनों के अपात्र होने के निष्कर्ष के साथ संस्तुति दी कि नए आरटीओ की तैनाती के संबंध में परिवहन मंत्री, मुख्यमंत्री से दिशा निर्देश प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई करें। ...और फिर ‘लाटरी’ निकली डीसी पठोई की।
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जानकारी के मुताबिक देहरादून के आरटीओ सुधांशु गर्ग देहरादून के निवासी हैं और गृह जनपद होने की वजह से उनकी तैनाती नहीं की जा सकती है। इसलिए उन्हें यहां से हटाया जाना था। दून के नए आरटीओ चयन के लिए शासन स्तर पर परिवहन सचिव डी सेंथिल पांडियन, अपर सचिव हरिश्चंद्र सेमवाल और अपर सचिव सविन बंसल की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर रिपोर्ट मांगी गई थी। परिवहन विभाग के तीन अफसरों एसके सिंह, डीसी पठोई और राजीव मेहरा के नाम का पैनल भेजकर समिति से दून आरटीओ के लिए सुपात्र नाम चयनित करने को कहा गया। दस्तावेज का परीक्षण करने के बाद समिति ने तीनों अफसरों को देहरादून का आरटीओ बनाए जाने के लिए अपात्र पाया।
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एसके सिंह के मामले में यह बात सामने आई कि वह पूरी सेवा अवधि में 13 साल 10 माह सुगम में तैनात रहे, जबकि दुर्गम में पांच साल तैनाती रही। एक साल तीन माह पूर्व उन्हें मुख्यालय में सहायक आयुक्त बनाया गया, ऐसे में उन्हें आरटीओ देहरादून नहीं बनाया जा सकता है। आरटीओ राजीव मेहरा के बारे में बताया गया कि पूरी सेवा अवधि में वह पांच साल आठ माह सुगम में तैनात रहे। जबकि छह साल दुर्गम क्षेत्र में तैनाती रही। वर्तमान में वह हल्द्वानी में बतौर आरटीओ तैनात हैं। उनका कार्यकाल एक साल पांच माह ही हुआ है, ऐसे में उन्हें भी देहरादून का आरटीओ नहीं बनाया जा सकता है।
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आरटीओ डीसी पठोई को लेकर उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अब तक की पूरी सेवा अवधि में वह सात साल तीन माह सुगम और चार साल छह माह दुर्गम में तैनात रहे। वर्तमान में वह दुर्गम क्षेत्र पौड़ी में बतौर आरटीओ तैनात हैं। उनका भी कार्यकाल दो साल आठ माह बीता है। ऐसे में आरटीओ पठोई भी दुर्गम में तैनाती अवधि अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक, वर्तमान पद पर तीन साल से कम और पूरी सेवा में दुर्गम सेवा अवधि 10 साल से कम होने की वजह से आरटीओ देहरादून बनने की अर्हता नही रखते हैं। उच्च स्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तीनों अफसर आरटीओ देहरादून बनाए जाने की अर्हता नहीं पूरी करते हैं। आखिर में कमेटी ने अपनी संस्तुति दी कि नए आरटीओ की तैनाती के संबंध में परिवहन मंत्री मुख्यमंत्री से दिशा निर्देश प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई करें। फिर आदेश जारी हुआ और उसमें दून के आरटीओ का नाम था, डीसी पठोई।