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आपदारोधी तकनीक से बनेंगे गरीबों के आशियाने
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 12 Aug 2016 10:07 AM IST
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- फोटो : Demo pic
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पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, अतिवृष्टि या भूकंप जैसी आपदाओं से गरीबों की सुरक्षा और उनके मकानों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने नई कार्ययोजना तैयार की है।
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जिसके तहत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना में मकानों को आपदारोधी तकनीक से बनाने का निर्णय लिया है। आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों से राज्य के विभिन्न जिलों के लिए मॉडल भी तैयार कराए गए हैं।
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केंद्र सरकार की ओर से गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाता है। इसके तहत प्रत्येक वर्ष औसतन 10 हजार लोगों को घर मुहैया कराए जाते हैं। चालू वित्तीय वर्ष में भी 8120 मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन प्रत्येक वर्ष पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, अतिवृष्टि आदि से कई मकान जमींदोज हो जाते हैं।
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इससे जानमाल का भारी नुकसान तो होता ही है, भविष्य में भी लोगों के सामने रहने की दिक्कत आ जाती है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित मकानों को आपदारोधी तकनीक से बनाने का निर्णय लिया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों ने पहाड़ों में टाइपोलॉजी के हिसाब से तकनीकी अध्ययन कर मकानों के मॉडल तैयार किए हैं।
साथ ही ग्राम्य विकास, आपदा प्रबंधन समेत कई विभागों के अफसरों, अभियंताओं और राजमिस्त्रियों को नई दिल्ली में इस तकनीक की बारीकियां बताने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बताया कि यदि योजना धरातल पर उतरी तो आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
योजना के लिए नहीं मिला बजट
जहां एक तरफ केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों को आपदारोधी बनाने की तैयार कर रही है, वहीं इस चालू वित्तीय वर्ष में निर्माण के लिए राज्य सरकार को अभी तक फूटी कौड़ी तक नहीं दी है। योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 8120 भवनों का निर्माण होना है। एक मकान के लिए एक लाख 30 हजार रुपये का बजट केंद्र से मिलता है।