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अभावों में पली आशा ने बढ़ाया पिता का मान
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 29 May 2014 07:53 PM IST
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शिमला रोड में माली का काम करने वाले रामदेव की बेटी आशा पर मां की मौत के बाद छोटी उम्र में ही घर की जिम्मेदारी का बोझ लद गया।
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इसके बावजूद आशा ने उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 75 फीसदी अंक लाकर पिता का मान बढ़ाया है। पिता रामदेव कहते हैं कि उनकी बेटी ने अच्छे नंबर लाकर सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
दो साल में छूट गया मां का आंचल
बंजारावाला निवासी आशा जब दो साल की थी, तभी सिर से मां का आंचल हट गया। पिता रामदेव बताते हैं कि छोटा भाई विजय तब तीन माह का था। मुझे मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ता था।
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धीरे-धीरे आशा ही छोटे भाई की देखभाल और घर का काम करने लगी।
संभाल रही घर की जिम्मेदारी
15 वर्ष की आशा के कंधों पर आज भी पूरे घर की जिम्मेदारी है। घर के साथ पढ़ाई पर भी उसका पूरा ध्यान रहा। घंटों तक रात में जागकर मेहनत से पढ़ाई के बाद सुबह से ही वह काम में जुट जाया करती थी।
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बगैर कोचिंग के नाम रौशन
नतीजे आए तो बगैर कोचिंग आशा ने 75 फीसदी अंक हासिल किए। देहरा पब्लिक इंटर कालेज की छात्रा आशा बताती हैं कि उसे पढ़ने और पढ़ाने का शौक है।
आगे चलकर शिक्षिका बनना चाहती है। छोटे भाई विजय को भी खूब पढ़ाएगी ताकि वह भी एक दिन अपने पांव पर खड़ा हो सके।