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आशा की उम्मीदों को लगे पंख, बन सकेगी टीचर
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 31 May 2014 09:47 AM IST
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माली का काम कर बच्चों का पालन कर रहे रामदेव को अब बिटिया की पढ़ाई की चिंता नहीं करनी होगी।
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रिटायर्ड चीफ इंजीनियर आगे आए
उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक पाने वाली रामदेव की बेटी आशा की मदद के लिए रिटायर्ड चीफ इंजीनियर आगे आए हैं। वह आशा की पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाने के लिए तैयार हैं। इससे आशा के शिक्षिका बनने का सपना पूरा होने की राह आसान होगी।
बंजारावाला निवासी आशा जब दो साल की थी, तभी सिर से मां का आंचल हट गया। छोटा भाई विजय तब तीन माह का था। पिता रामदेव बताते हैं कि उन्हें मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ता था। धीरे-धीरे आशा ही छोटे भाई की देखभाल और घर का काम करने लगी।
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हाईस्कूल की परीक्षा में 75 फीसदी अंक
15 वर्ष की आशा पर आज पूरे घर की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद उसने उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में 75 फीसदी अंक हासिल किए। अमर उजाला में 29 मई को अभावों में पली आशा की खबर प्रकाशित होने के बाद दून के एक रिटायर्ड इंजीनियर उसकी मदद के लिए आगे आए हैं।
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रिटायर्ड इंजीनियर का कहना है कि शीघ्र ही वह आशा के घर जाएंगे। आशा और उसकी छोटे भाई की पढ़ाई के लिए जो भी खर्च आएगा वे उसकी पूरी पढ़ाई का खर्च उठाएंगे। 74 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर का कहना है कि वे हर महीने कुछ धनराशि आशा को भेजेंगे। इंजीनियर ने अपने नाम का खुलासा करने से इनकार किया है।