होटलों को मिली गंगा को मैला करने की 'सजा'
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गंगा में गंदगी डालने के मद्देनजर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर की गई हरिद्वार और ऋषिकेश के आश्रमों और होटलों की जांच के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
बोर्ड मुख्यालय, देहरादून के सदस्य सचिव ने बीती 15 मई को ऋषिकेश के दो होटलों की बंदी के आदेश दिए हैं। जबकि बीएचईएल और एक फैक्ट्री के अलावा हरिद्वार और ऋषिकेश के तीन होटलों और एक फैक्ट्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड इन होटलों को भी बंद कराए जाने के आदेश जारी कर सकता है।
गौरतलब है कि एनजीटी नई दिल्ली की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय देहरादून को गंगा में गंदगी प्रवाहित करने वाले बड़े आश्रमों और होटलों की जांच कर रिपोर्ट दिए जाने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए एनजीटी की ओर से गठित जांच समिति में प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों सहित केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों को भी शामिल किया गया था।
की गई थी बड़े आश्रमों और होटलों की जांच
जांच समिति ने 23 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच में हरिद्वार और ऋषिकेश के बड़े आश्रमों और होटलों की जांच की गई थी। बताया गया है कि जल्द ही एनजीटी इस जांच रिपोर्ट पर सुनवाई करेगा लेकिन इस जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय देहरादून की ओर से अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बोर्ड मुख्यालय के सदस्य सचिव विनोद सिंघल एवं वैज्ञानिक अधिकारी एसएस पाल ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत ऋषिकेश के रेडीसन होटल और होटल तपोवन रिसोर्ट की बंदी के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
जबकि ऋषिकेश स्थित कंट्री इन, डिवाइन रिसॉर्ट, एमरिस होटल तथा हरिद्वार स्थित बीएचईएल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) व अमन मेटल फैक्ट्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के मानकों के अनुरूप काम नहीं किए जाने पर ऋषिकेश पेयजल निगम को भी यह नोटिस जारी किया गया है।
संतोषजनक जवाब न होने पर संबंधित होटल एवं औद्योगिक इकाइयों को बंदी के आदेश जारी किए जाएंगे। वहीं, जांच में शामिल आश्रमों की रिपोर्ट पर एनजीटी की सुनवाई के बाद आगे का कदम उठाया जाएगा।