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वॉर मेमोरियल निर्माण पर सियासत के दांव पेंच तेज

Tue, 18 Aug 2015 12:02 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 18 Aug 2015 12:02 PM IST
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politics on uttarakhand war memorial.

उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में बनने वाले वॉर मेमोरियल पर भाजपा की सियासी चतुराई से चित हुई कांग्रेस इसका तोड़ तलाश रही है।

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बरसों से जिस वॉर मेमोरियल का जिक्र शौर्य व विजय दिवस पर सजने वाले सियासी मंचों तक सीमित था अब उसके निर्माण पर केंद्र और प्रदेश सरकार आमने सामने है। भाजपा ने केंद्र से मिलकर चीड़ बाग में वॉर मेमोरियल के लिए जिस तेजी से भूमि सुनिश्चित कर शिलान्यास तक तय कर बाजी मारी अब प्रदेश सरकार इसका विकल्प ढूंढ रही है।
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इस प्रतिस्पर्धा के भले कई कारण हैं लेकिन सबसे अहम उस दस लाख की आबादी का वोट बैंक भी है जो सीधे तौर पर शहीद और पूर्व सैनिकों से जुड़ा है।

स्टेट वॉर मेमोरियल के निर्माण के लिए भूमि की तलाश वर्ष 2009 में तत्कालीन भाजपा सरकार के समय से शुरू होकर अब तक जारी है। वर्ष 2012 में जब कांग्रेस को सत्ता मिली तो उन्होंने भाजपा से एक कदम आगे बढ़कर इसके निर्माण का बेड़ा उठाया पर भूमि का मसला उनकी राह का रोड़ा बना।
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स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर अमर उजाला ने मां तुझे प्रणाम श्रृंखला के तहत यह मामला उठाया कि जांबाज जवानों के इस प्रांत की अस्थायी राजधानी में प्रस्तावित वॉर मेमोरियल आखिर कब बनेगा ? इस अभियान की तपिश महसूस हुई तो सरकार ने मेमोरियल के लिए जमीन खोजने का अभियान तेज कर दिया।

इधर, वॉर मेमोरियल के लिए सरकार में सक्रियता बढ़ी और उधर भाजपा खेमे में बेचैनी बढ़ी। मामला दोनों पार्टियों की सरकारों के तीन वर्ष में कोई प्रगति नहीं होने से बराबरी पर था लेकिन पासा तब पलटा जब भाजपा सांसद तरुण विजय ने वॉर मेमोरियल के निर्माण का मुद्दा रक्षा मंत्रालय के समक्ष रखा।

भाजपा ने बेहद चतुराई से मौके को लपका। चीड़ बाग स्थित जिस भूमि के लिए भाजपा कांग्रेस कई बार प्रयास करती रही रक्षा मंत्रालय ने उस भूमि को सांसद की पहल पर देने के लिए हामी भर दी। सीएम हरीश रावत ने 26 जुलाई को भूमि चिन्हीकरण के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना रहे थे उधर रक्षा मंत्री के समक्ष मेमोरियल के शिलान्यास तक फाइनल हो गया।


सैन्य भूमि हस्तांतरण को लगने वाले महीनों साल के लंबे अरसे को 15 दिन में निपटा दिया गया। खुद रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने स्वतंत्रता दिवस पर उत्तराखंड पहुंच कर इसकी तसदीक भी कर दी। पूर्व सैनिकों से जुड़े इस बड़े मसले पर कांग्रेस पहले बैकफुट पर आई लेकिन अब एकाएक उन्होंने अपने स्तर पर वॉर मेमोरियल निर्माण का वादा पूरा करने का नया वादा कर दिया।

सीएम तो चीड़ बाग में मेमोरियल निर्माण से ही अनभिज्ञता जता रहे हैं। चीड़ बाग में केंद्र के वॉर मेमोरियल फाइनल करने के बाद अब राज्य सरकार की अलग से स्मारक निर्माण के लिए भूमि चयन की कसरत से लग रहा है कि बरसों तक एक वॉर मेमोरियल के लिए तरस रहे पूर्व सैनिकों को शहीदों को नमन के लिए दो स्मारक मिलेंगे।

प्रदेश सरकार की कोशिशें
- स्टेट वॉर मेमोरियल के लिए 2009 में सर्वप्रथम चीड़बाग सैन्य भूमि चयनित।
- रक्षा मंत्रालय से भूमि स्वीकृति का मामला दो वर्ष तक अधर में लटका रहा।
- वर्ष 2011 में सर्वे आफ इंडिया की चयनित 10.4 हेक्टेयर भूमि प्रस्ताव पर एनओसी नहीं मिली।
- वर्ष 2012 में ग्राम डांडा लखौड़ में 1.6 हैक्टेयर आवंचित भूमि उपयुक्ति नहीं पाई गई।
- वर्ष 2013 में पुरानी जेल के पास चयनित भूमि का प्रस्ताव बाद में हुआ खारिज।
- वर्ष 2014 में गठित भूमि चयन समिति की सिफारिशों को किया खारिज।
- वर्ष 2015 में अमर उजाला अभियान के बाद सीएम ने भूमि चयन के लिए नए सिरे से कमेटी बनाई।

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