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बिजली कटौती पर राजनीति तेज: पूर्व सीएम हरीश रावत ने किया उपवास, कहा-नेता नहीं, वरिष्ठ नागरिक होने के नाते उठा रहा समस्या
Sat, 23 Apr 2022 12:14 PM IST
रेनू सकलानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 23 Apr 2022 12:14 PM IST
सार
पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश में कई परियोजनाएं हैं जिनकी यदि साधारण तरीके से समय पर मरम्मत कर ली गई होती तो इस समय पानी की उपलब्धता रहती और इससे विद्युत उत्पादन बढ़ सकता था।
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harish rawat
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत प्रदेश में बिजली कटौती के विरोध में शुक्रवार को मौन उपवास पर बैठे। उपवास के बाद उन्होंने कहा कि राज्य में हर दिन आठ से दस घंटे बिजली कटौती की जा रही है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सीनियर सिटीजन के नाते, यह उनका गैर राजनीतिक प्रयास है इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
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सरकार अपनी कमियों को देख सके और विद्युत व्यवस्था में जो अव्यवस्था पैदा हो रही है उसको दुरुस्त करें। पूर्व सीएम ने कहा कि प्रदेश में कई परियोजनाएं हैं जिनकी यदि साधारण तरीके से समय पर मरम्मत कर ली गई होती तो इस समय पानी की उपलब्धता रहती और इससे विद्युत उत्पादन बढ़ सकता था।
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यह ऐसा समय है जब यूपीसीएल को बाहर से भी बिजली खरीदकर व्यवस्था रखनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि लोगों पर जानबूझकर बिजली की कटौती थोपी गई है। बिजली के दाम लगातार बढ़ाए गए। अब बिजली की कटौती और उधर वनों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जंगलों में जहां पानी के श्रोत हैं, यदि वो जंगल जल जाएंगे तो उससे पानी के श्रोतों पर भी बुरा असर पड़ेगा। पूर्व सीएम ने कहा कि पेयजल संकट से राज्य पहले ही जूझ रहा है।