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लोकायुक्त पर रार, खंडूडी़ ने भी कर दिया वार...
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 23 Oct 2013 11:46 AM IST
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कांग्रेस के जो धुरंधर आज लोकायुक्त बिल का विरोध कर रहे हैं वो विधेयक पास होते समय सदन में मौजूद ही नहीं थे बल्कि इसका विरोध करने वाले टिहरी के तत्कालीन कांग्रेसी विधायक किशोर उपाध्यक्ष का भी साथ नहीं दिया। तब का समर्थन और अब का विरोध कांग्रेस की दोहरी नीति को भी उजागर कर रहा है।
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31 अक्टूबर 2011 को जब लोकायुक्त विधेयक को सदन में पास किया तो उस समय कांग्रेस के बड़े नेताओं में उस समय के नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत व प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य दोनों समेत दर्जन भर मौजूदा विधायक भी मौजूद थे।
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जनविरोधी व असंवैधानिक नजर आ रहा
इत्तेफ़ाक से अब रावत व आर्य कैबिनेट मंत्री भी है। लेकिन तब किसी ने विरोध नहीं किया और बिल ध्वनिमत से पास हो गया। लेकिन अब कांग्रेस को यह बिल जनविरोधी व असंवैधानिक नजर आ रहा है। विधेयक पास होते समय तो सदन में चुप रही कांग्रेस अब उसे अव्यवहारिक बता रही है।
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उस समय का एक वाकया यह भी था कि टिहरी से उस वक्त के कांग्रेस विधायक किशोर उपाध्याय ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए वेल में धरना भी दिया।
लेकिन उस वक्त किशोर उपाध्याय का साथ देने के बजाय कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने विधेयक का समर्थन करने व किशोर को धरने से उठाने में ज्यादा दिलचस्पी ली। उपाध्याय ने बताया कि मैं उस समय भी इस कानून के पक्ष में नहीं था और अभी भी नहीं हूं।
ना कोई विरोध था और ना एतराज
इस पूरे मसले पर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूडी का कहना है कि सदन में जिस दिन लोकायुक्त विधेयक पर चर्चा हुई उस समय तो कांग्रेस का पूरा समर्थन था। तब कांग्रेस को इसके असंवैधानिक व अव्यवहारिक बिन्दु भी नजर नहीं आए। ना कोई विरोध था और ना एतराज।
इसकी वजह उस समय विधानसभा चुनाव भी थे। क्योंकि डेढ़ महीने बाद ही प्रदेश विधानसभा का चुनाव होना था, कांग्रेस को आशंका थी कि कहीं जनता उसके प्रतिकूल फैसला ने ले लें। और, अब कांग्रेस राष्ट्रपति के निर्णय को ही असंवैधानिक बताने पर तुली है।