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मिले सख्ती का अधिकार तो पुलिस करेगी वार
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 Mar 2015 01:12 PM IST
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7180 हादसे, 4364 मृतक और 7924 घायल। वर्ष 2010 से 2014, यानी पांच साल के ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि उत्तराखंड की सड़कों पर सफर कितना खतरनाक हो गया है।
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हादसों की एक हकीकत यह है कि अधिकतर की वजह यातायात नियमों का उल्लंघन है, लेकिन इससे भी गंभीर सच यह है कि यातायात नियमों का पालन कराने वाली पुलिस के पास इतने अधिकार नहीं है कि वह नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई कर सके। अब पुलिस मुख्यालय ने अधिकार बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
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पांच वर्षों में जहां प्रदेश की सड़कों पर वाहनों की संख्या पांच लाख से अधिक हो गई है, वहीं पुलिस को सिर्फ आठ धाराओं में चालान करने का अधिकार है। ऐसे में बंधे हाथों से पुलिस नियम तोड़ने वालों पर लगाम कसे भी तो कैसे?
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जबकि पड़ोसी राज्यों की पुलिस को यातायात नियमों के उल्लंघन पर उत्तराखंड के मुकाबले 13 गुना अधिक धाराओं में कार्रवाई का अधिकार है। चालान शुल्क भी उत्तराखंड से अधिक है। इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने शमन शुल्क बढ़ाने और चालान अधिकारों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव शासन को भेज रहा है।
परिवहन विभाग बना रहता है सुस्त
प्रदेश में परिवहन विभाग को पुलिस से अधिक, 38 धाराओं में चालान का अधिकार है, लेकिन वह सड़कों पर नियम पालन करवाने के प्रति सुस्त रहता है। इसकी तस्दीक वर्ष 2010 से वर्ष 2014 तक नियम तोड़ने वालों की संख्या से होता है।
पांच साल में 21 लाख 57 हजार 496 लोगों पर कार्रवाई हुई है। इनमें भी करीब आधी से ज्यादा कार्रवाई पुलिस ने की है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि अगर परिवहन विभाग गंभीर कार्रवाई करता तो नियम तोड़ने वालों की तादाद इतनी नहीं होती।
कहां कितनी धाराओं में चालान
प्रदेश ------ धाराएं
उत्तर प्रदेश - 21
चंडीगढ़ - 104
पंजाब - 15
प्रदेश पुलिस को यह अधिकार
उत्तराखंड पुलिस बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने पर, धारा 177, बिना हेलमेट धारा 177/129, विधि निर्देशों का पालन न करने पर 179-1, सूचना छिपाने पर 179-2, तेज गति से वाहन चलाने पर, 183-2, खतरनाक तरीके से वाहन चलाने और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने पर, धारा 184, शारीरिक या मानसिक अक्षम द्वारा वाहन चलाने पर धारा, 186 और वाहन चलाते वक्त सीट बेल्ट नहीं बांधने पर धारा 138-3 के तहत वाहन चालकों पर कार्रवाई कर सकती है।
पांच साल में हुए हादसे
वर्ष - दुर्घटनाएं - मृतक
2010 - 1493 - 931
2011 - 1508 - 937
2012 - 1472 - 853
2013 - 1297 - 765
2014 - 1440 - 878
चालान शुल्क की तुलना
अपराध --------- उत्तराखंड - यूपी - चंडीगढ़
बिना नंबर प्लेट - 100 - 100-300 - 300-600
बिना हेलमेट - 100 - 100-250 - 300-600
सूचना छिपाना - 250 - 350 - 800-1200
तेज गति - 300 - 300-700 - 700-1200
खतरनाक गति - 500 - 500-1000 - 1000-2000
अक्षम द्वारा - 200 - 500-1000 - 1000-2000
वाहन चलाना
सीट बेल्ट - 100 - 100-200 - 300-600
पांच साल में प्रदेश की सड़कों पर वाहनों की संख्या 5,03,905 हो चुकी है। सड़कों पर यातायात नियम पुलिस का दायित्व माना जाता है, लेकिन हमारे अधिकार सीमित हैं। हम चाहते हैं कि दूसरे प्रदेशों की तरह नहीं तो कम से कम प्रदेश के परिवहन विभाग की तरह 38 धाराओं में कार्रवाई का अधिकार पुलिस को मिले। शमन शुल्क भी बढ़ाया जाना चाहिए। इससे लापरवाह वाहन चालकों पर अंकुश में मदद मिलेगी और हादसों पर भी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक