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Pod taxi In Dehradun: पॉड टैक्सी चलाना घाटे का सौदा नहीं... होगी अच्छी कमाई, आसानी से निकल जाएगी लागत
Fri, 30 Jun 2023 07:12 PM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jun 2023 07:12 PM IST
सार
मुख्य सचिव ने कहा था कि जहां नियो मेट्रो नहीं चल सकती, वहां पीआरटी के तहत सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाया जाएगा। इसके तहत पहले चरण में पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक पाॅड टैक्सी चलाने का निर्णय लिया गया था।
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पाॅड टैक्सी
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
राजधानी देहरादून के जिन सघन इलाकों में नियो मेट्रो नहीं चल सकती। वहां पर्सनल रैपिड ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट के तहत पाॅड टैक्सी चलाने का निर्णय शासन ने लिया था। पहले चरण में पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक छह किमी लंबे रूट पर इसका संचालन करने के लिए सर्वे पूरा हो गया है। सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि इस रूट पर पाॅड टैक्सी का संचालन घाटे का सौदा नहीं है। प्रोजेक्ट से होने वाली कमाई से उसके संचालन का खर्च आसानी से निकल जाएगा। इससे मेट्रो रेल काॅरपोरेशन काफी उत्साहित है।
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गौरतलब है कि मुख्य सचिव ने कहा था कि जहां नियो मेट्रो नहीं चल सकती, वहां पीआरटी के तहत सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाया जाएगा। इसके तहत पहले चरण में पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक पाॅड टैक्सी चलाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए फिजिबिलिटी सर्वे करने के आदेश दिए गए थे। उत्तराखंड मेट्रो रेल काॅरपोरेशन के एमडी जितेंद्र त्यागी ने बताया कि सर्वे पूरा कर लिया गया है। सर्वे के नतीजे बेहद सकारात्मक आए हैं। इस रूट पर पाॅड टैक्सी चलाने से यात्रियों को भी काफी राहत मिलेगी। प्रोजेक्ट में आने वाली लागत को तत्काल तो नहीं निकाला जा सकेगा लेकिन पॉड टैक्सी से होने वाली कमाई काफी अच्छी रहेगी।
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अब बोर्ड के समक्ष जाएगी रिपोर्ट
एमडी जितेंद्र त्यागी ने बताया कि सर्वे की रिपोर्ट को मेट्रो बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। इसके अध्यक्ष सीएस डाॅ. एसएस संधु हैं। उनकी सहमति मिलते ही डीपीआर तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा।
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मेट्रो काॅरपोरेशन ने दिया था प्रस्ताव
उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पॉड टैक्सी को पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक चलाने का प्रस्ताव दिया था। पहले इस रूट पर रोप-वे चलाने की योजना थी। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने इस प्रस्ताव को जल्द लागू कराने के आदेश दिए थे।
क्या है पॉड टैक्सी
पॉड टैक्सी पूरी तरह स्वचलित होती है। यह कार के आकार की होती है और स्टील के ट्रैक पर चलती है। इस टैक्सी को चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके जरिये तीन से लेकर छह यात्रियों को एक बार में ले जाया जा सकता है। यह सड़क पर नहीं बल्कि कॉलम पर बने स्ट्रक्चर पर चलेगी। यह यात्रियों के बटन दबाने पर खुद उनके पास पहुंच जाएगी। यह विश्व का सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। दुनिया में पहली पॉड टैक्सी वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में वर्ष 1970 में चलाई गई थी।