PM Modi: सीमावर्ती गांवों से उपेक्षा की धुंध छंटी, प्रधानमंत्री ने बिखेरी विकास किरण, जादूंग की मुराद हुई पूरी
जादूंग गांव के लोग जिन्हें युद्ध के दौरान उत्तरकाशी के डुंडा और बगोरी में बसाया गया था, वे लंबे समय जादूंग को दोबारा आबाद करने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा था। आज प्रधानमंत्री ने जादूंग गांव को विकसित करने की बात कहकर उनकी मुराद पूरी की।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दशकों से उपेक्षित उत्तरकाशी के नेलांग, जादूंग और चमोली जिले के टिम्मरसैंण को विकसित करने की बात कह कर इन स्थलों की पहचान पर छायी धुंध को हटाकर उम्मीद की किरण बिखेरी है। उन्होंने उत्तराखंड के एक दिवसीय दौरे में राज्य स्थित नए पर्यटन स्थलों के विकसित करने की बात कही। उन्होंने मुख्यमंत्री को राज्यभर में 50 नए पर्यटक स्थलों को सुविधा संपन्न बनाए जाने का सुझाव दिया।
उत्तरकाशी जिले के नेलांग और जादूंग गांव भारत-चीन युद्ध के बाद से वीरान हो गए थे। जादूंग गांव के लोग जिन्हें युद्ध के दौरान उत्तरकाशी के डुंडा और बगोरी में बसाया गया था, वे लंबे समय जादूंग को दोबारा आबाद करने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा था। आज प्रधानमंत्री ने जादूंग गांव को विकसित करने की बात कहकर उनकी मुराद पूरी की। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में नेलांग और चमोली जिले के टिम्मरसैंण का भी जिक्र किया।
देश का अंतिम शिवालय है टिम्मरसैंण
चमोली जिले के भारत तिब्बत सीमा से लगी नीती घाटी में टिम्मरसैंण गुफा है, जिसमें बर्फ के शिवलिंग का आकार उभरता है। स्थानीय लोग इसे बाबा बर्फानी के नाम से बुलाते हैं। नीती गांव से तीन किमी पहले पैदल दूरी तय करने के बाद बाबा बर्फानी की गुफा में पहुंचा जाता है।
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टिम्मरसैंण महादेव को देश का अंतिम शिवालय माना जाता है। प्रधानमंत्री ने अपने दौरे में टिम्मरसैंण का जिक्र कर स्थानीय लोगों में तीर्थाटन और पयर्टन बढ़ने की उम्मीद जगी है। कागा गांव के पूर्व प्रधान व प्रशासक पुष्कर सिंह राणा ने कहा कि उम्मीद है कि अब जल्द यहां बुनियादी सुविधा जुटेंगी और देश का अंतिम शिवालय पहला जाना जाएगा।