PM मोदी ने ओलांद को दी उत्तराखंड की अनमोल विरासत
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गढ़वाल राइफल्स के रणबांकुरों की प्रथम विश्व युद्ध में लिखी गई शौर्यगाथा की याद दिलाने वाली प्रतिमा प्रस्ताव के बाद भी बेशक फ्रांस में नहीं लग पाई अलबत्ता, उसकी प्रतिकृति 88 साल बाद वहां पहुंच गई।
वह भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिये। मोदी ने अपनी फ्रांस यात्रा में राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के वीर सैनिकों के प्रतीक कांसे की प्रतिमा की प्रतिमूर्ति भेंट की है। इससे गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों में काफी उत्साह है।
दरअसल प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों की शहादत को चिरस्थायी बनाने के लिए गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के केंद्र लैंसडौन में एक युद्ध स्मारक बनाया गया है। इसका निर्माण चेल्सिया ब्रिटेन के एलएस मेरीफील्ड ने किया।
प्रथम विश्व युद्ध की याद दिलाती है यह प्रतिमा
स्मारक को कोलकाता की मार्टिन कंपनी ने बनाया था। स्मारक में कांसे की आदमकद सैनिक की प्रतिमा लगी है (जिसे लोग कई बार लोग गलती से विश्व युद्ध के ही शूरवीर गबर सिंह की प्रतिमा समझते हैं)।
स्मारक का उद्घाटन भारत के तत्कालीन प्रधान सेनापति लॉर्ड रॉयलिंस ने 11 नवंबर 1923 को किया था। रेजीमेंट के लोग बताते हैं कि यहां लगी प्रतिमा पहले फ्रांस में स्थापित की जानी थी। लेकिन फिर इसे रेजिमेंट मुख्यालय में लगाने का फैसला हुआ।
प्रतिमा के पीछे की दीवार में पीतल की प्लेटों पर उन शहीदों के नाम लिखे हैं जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में अदम्य शौर्य दिखाते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। पीछे की दीवार पर गीता का श्लोक लिखा गया है।
कर्नल विभूति भूषण नवानी (सेवानिवृत्त) और कर्नल कुलदीप गुसांई का कहना है कि गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट का नाम विश्व फलक पर एक बार फिर स्वर्णाक्षरों में दर्ज हुआ है।