प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण उनके लिए सबसे खास है। इसे दिव्य और भव्य बनाया जाएगा। उन्होंने निर्माण स्थल का निरीक्षण करते हुए डिजायन को देखा और शासन-प्रशासन व कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। दिवाली के दिन केदारनाथ धाम पहुंचे प्रधानमंत्री मंदाकिनी नदी के किनारे से होते हुए पीएम मोदी मंदिर के पीछे बायीं तरफ पहुंचे, जहां आदिगुरु शंकराचार्य के समाधिस्थल व संग्रहालय का निर्माण होना है। वे, यहां पर वाहन से उतरे और निर्माण स्थल पर पहुंचे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बताया कि केदारनाथ में उनके लिए क्या है सबसे खास
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36 मीटर गोलाकार में होगा समाधिस्थल
उन्होंने कार्य के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आर्किटेक्ट द्वारा बनाए गए समाधिस्थल के डिजायन को गहनता से देखा और उसके तहत होने वाले पुनर्निर्माण कार्य को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने मुख्य सचिव से इस बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा ‘यह पुनर्निर्माण कार्य मेरे लिए सबसे खास है, आदिगुरु शंकराचार्य भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। केदारनाथ धाम में आने वाले देश-विदेश के बाबा के भक्त उनके बारे में जानकारी प्राप्त करें, यह हमारे लिए सबसे बड़े गौरव की बात होगी, इसके निर्माण में दिव्यता और भव्यता का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए’।
मंदिर के पीछे बाई तरफ दिव्य शिला के निकट आदिगुरु शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है। 3 मीटर चौड़ा व 40 मीटर लंबा भूमिगत रास्ता होगा। इसके बाद 36 मीटर गोलाकार क्षेत्र में समाधिस्थल का पुनर्निर्माण किया जाएगा, जिसकी गहराई छह मीटर होगी। प्रवेश व निकासी के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जाएंगे। दूसरे चरण में यहां संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा, जिसमें आध्यात्म से जुड़ा साहित्य व ज्ञानवर्धक वस्तुएं रखी जाएंगी।
आदिगुरु शंकराचार्य का समाधिस्थल, मूर्ति के साथ 16/17 जून 2013 की आपदा में मंदाकिनी नदी के सैलाब में बह गया था। तब, से इस धार्मिक स्थल के पुनर्निर्माण को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए।