प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी के लिए खड़ी कर दी ये बड़ी मुसीबत
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। पीएम नरेन्द्र मोदी की देहरादून रैली जहां भाजपाइयों में उत्साह का संचार कर गई, वहीं कांग्रेसियों की पेशानी पर बल भी डाल गई।
देहरादून में पार्टी के युवराज राहुल गांधी की रैली को टालती जा रही कांग्रेस के सामने अब दोहरी चुनौती है। उसे न सिर्फ राहुल की रैली करानी है बल्कि मोदी की रैली के बराबर उसे हिट भी बनाना है।
दरअसल, मोदी की रैली में उमड़े जनसैलाब ने भाजपाइयों को भी अचरज में डाल दिया है। राहुल के नोटबंदी पर लगातार हमले के बाद कांग्रेसियों की पीएम की रैली पर नजर थी और वे ये मानकर बैठे थे कि रैली में शायद उतनी भीड़ न जुटे जितने भाजपा दावे कर रही है।
गड़बड़ाता दिख रहा है कांग्रेस का गणित
भीड़ जुटने को नोटबंदी के फैसले से जोड़ा जाए तो कांग्रेस का गणित गड़बड़ाता दिख रहा है। ऐसे में कांग्रेस के सामने नए सिरे से मंथन करने की चुनौती रहेगी।
सियासी जानकारों की मानें तो जनसभाओं में जुटी भीड़ चुनावी जीत और हार का बेशक प्रमाण न हो, मगर सियासी दलों के लिये यह मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने का काम जरूर करती है।
साथ ही विरोधियों के मनोबल को गिराने में भी मदद करती है। जाहिर है कि रैली की कामयाबी को लेकर कांग्रेस चाहे जो तर्क गढे मगर उस पर निश्चित तौर पर दबाव बढ़ गया है।
राहुल गांधी की रैली कराने का जतन कर रही है कांग्रेस
लंबे समय से पार्टी राजधानी देहरादून में राहुल गांधी की रैली कराने का जतन कर रही है। मगर हर बार उसके प्रयास नाकाम हो जाते हैं।
टिहरी संसदीय क्षेत्र की सतत विकास संकल्प यात्रा का समापन राहुल गांधी की दून रैली से ही होना था लेकिन राहुल नहीं आए। इसके बाद राहुल की रैली का कार्यक्रम फिर तय हुआ।
मगर राहुल रैली करने अल्मोड़ा चले गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने सफाई दी कि परेड ग्राउंड में चूंकि कुछ व्यापारिक प्रदर्शनियां लगी हैं, इसलिये पार्टी उनमें खलल नहीं डालना चाहती थी।
कांग्रेस दून में राहुल की रैली कराने का साहस करेगी?
सच्चाई जो भी हो, लेकिन राहुल की रैली टलने की वजह संगठन और सरकार के बीच छिड़ी रार भी मानी गई। इस बीच पीएम का अचानक दून रैली का कार्यक्रम बना और अब वे जनसभा करके चले भी गए हैं।
ऐसे में अब सबकी निगाहें कांग्रेस पर होंगी। बेशक कांग्रेस रैली में जुटी भीड़ को भाड़े की करार दे रही है, मगर वह इसकी कामयाबी को लेकर उसके पास कोई जवाब नहीं है।
अब प्रश्नों के घेरे में वह स्वयं है। प्रश्न यह है कि अब कांग्रेस दून में राहुल की रैली कराने का साहस करेगी? रैली के जरिये मोदी जो जनसैलाब की जो लकीर खींच गए हैं, उसे लांघ पाएगी?