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अंतरराष्ट्रीय है गौरैया के कम होने की समस्या
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 12 Jun 2015 04:11 PM IST
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गौरैया के कम होने की समस्या केवल क्षेत्र विशेष की नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय है। गौरैया की संख्या घटती गई लेकिन हमें इसका पता तक नहीं चल पाया।
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यह बात पक्षी वैज्ञानिकों को भी बहुत देर से पता चली। आमजन तक तो अब भी इनके घटने की बात नहीं पहुंच पाई है। अमर उजाला की इस मुहिम का उद्देश्य यही है कि गौरैया संरक्षण के इस अभियान से आम आदमी जुड़े। सब मिलकर प्रयास करेंगे तो फिर से गौरैया की चहचहाहट घरों के आसपास सुनाई देने लगेगी।
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रंगीन पक्षियों पर रहा ध्यान
गुरुकुल कांगड़ी विवि की पक्षी विविधता एवं पक्षी संवाद प्रयोगशाला के पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट एवं डॉ. विनय कुमार सेठी ने बताया हमारे देश की कई संस्थाएं शोध कर रही हैं।
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बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी मुंबई, सलीम अली सेंटर फॉर ऑरनिथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री कोयंबटूर और भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून आदि की ओर से पक्षी जीवन से जुड़ी घटनाओं और उनकी गणना आदि पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चिंतन किया जा रहा है।
इन सबके बावजूद गौरैया के घटने का पता देर से चल पाया। डॉ. सेठी के मुताबिक हमारे देश में गौरैया की संख्या को लेकर ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि बड़े, रंगीन और प्रवासी पक्षियों पर लोगों का अधिक ध्यान रहा।
पक्षी वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सेठी ने बताया कि ब्रिटेन में गौरैया की संख्या बढ़ने के बजाय घटकर आधी रह गई है। लंदन शहर में तो गौरैया की संख्या में 80 फीसदी तक गिरावट आई है।
अपने घर से करें संरक्षण की शुरुआत
अगर नया घर बना रहे हैं तो उसमें ऐसा स्थान जरूर छोड़ें जहां गौरैया घौसला बना सके। अगर पहले से घर बना हुआ है और इसके लिए स्थान नहीं है तो आप घर में घौसला लगा सकते हैं।
जानकारी के लिए यहां करें संपर्क
गुरुकुल कांगड़ी विवि में गौरैया के संरक्षण के लिए काफी काम किया जा रहा है। यहां पर पक्षी विविधता एवं पक्षी संवाद प्रयोगशाला में किसी भी कार्यदिवस में सुबह दस से शाम पांच बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
आप भी इस मुहिम का हिस्सा बनें, हमें इस नंबर पर मैसेज करें- 9675891299