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सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को नहीं देना होगा प्लाज्मा का शुल्क
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देहरादून। कोरोना के गंभीर मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत पड़ने पर सरकार की ओर से तय शुल्क 12 हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं। अगर यही मरीज राजकीय दून मेडिकल अस्पताल या किसी अन्य सरकारी अस्पताल में भर्ती है तो उन्हें कोई भी शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि अगर किसी निजी अस्पताल से कोई व्यक्ति दून अस्पताल में प्लाज्मा लेने आता है तो उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क 12 हजार रुपये चुकाने होंगे। इसमें रक्तदाता की विभिन्न जांचें और प्रोसेसिंग का शुल्क भी शामिल होगा। अगर कोई गंभीर मरीज दून अस्पताल में भर्ती है और उन्हें प्लाज्मा की जरूरत होती है या कोई व्यक्ति प्लाज्मा दान करता है तो उनसे किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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यह वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण का दौर है। इसमें अगर किसी तरह व्यक्ति की जान बच पाती है तो यह बहुत बड़ा का कार्य होगा। ऐसे में अगर कोई सक्षम नहीं है तो उनसे प्लाज्मा क्या किसी भी तरह के इलाज का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
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-शेर सिंह नेगी, होटल स्वामी, रिस्पना पुल
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सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों से अगर प्लाज्मा का शुल्क नहीं लिया जा रहा है तो यह सराहनीय है। कोई अगर निजी अस्पताल में भर्ती है और शुल्क देने में सक्षम है तो यह किसी तरह का इशू नहीं बनना चाहिए। सवाल आदमी के स्वस्थ होने का है।
-विनोद भट्टकोटी, बद्रीपुर
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कोरोना महामारी में किसी से प्लाज्मा या अन्य इलाज का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। अगर कोई निजी अस्पताल में अपने खर्चे पर इलाज करा रहा है तो ऐसे में आम आदमी का हक भी नहीं मारा जाना चाहिए। अगर कोई सक्षम है तो निर्धारित शुल्क चुकाना चाहिए।
-अमित रतूड़ी, नवादा
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि अगर किसी निजी अस्पताल से कोई व्यक्ति दून अस्पताल में प्लाज्मा लेने आता है तो उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क 12 हजार रुपये चुकाने होंगे। इसमें रक्तदाता की विभिन्न जांचें और प्रोसेसिंग का शुल्क भी शामिल होगा। अगर कोई गंभीर मरीज दून अस्पताल में भर्ती है और उन्हें प्लाज्मा की जरूरत होती है या कोई व्यक्ति प्लाज्मा दान करता है तो उनसे किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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यह वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण का दौर है। इसमें अगर किसी तरह व्यक्ति की जान बच पाती है तो यह बहुत बड़ा का कार्य होगा। ऐसे में अगर कोई सक्षम नहीं है तो उनसे प्लाज्मा क्या किसी भी तरह के इलाज का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
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-शेर सिंह नेगी, होटल स्वामी, रिस्पना पुल
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सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों से अगर प्लाज्मा का शुल्क नहीं लिया जा रहा है तो यह सराहनीय है। कोई अगर निजी अस्पताल में भर्ती है और शुल्क देने में सक्षम है तो यह किसी तरह का इशू नहीं बनना चाहिए। सवाल आदमी के स्वस्थ होने का है।
-विनोद भट्टकोटी, बद्रीपुर
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कोरोना महामारी में किसी से प्लाज्मा या अन्य इलाज का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। अगर कोई निजी अस्पताल में अपने खर्चे पर इलाज करा रहा है तो ऐसे में आम आदमी का हक भी नहीं मारा जाना चाहिए। अगर कोई सक्षम है तो निर्धारित शुल्क चुकाना चाहिए।
-अमित रतूड़ी, नवादा