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पर्यावरण की अनदेखी कर विकास घातक

Wed, 17 Jul 2013 09:01 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Wed, 17 Jul 2013 09:01 PM IST
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Plans on the mountain by scientific method

हिमालयी राज्यों में विकास को गति देना वक्त की जरूरत है। लेकिन विकास का ऐसा माडल बनाया जाना चाहिए जो पहाड़ों पर पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा को बल देने के साथ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के बीच संतुलन कायम करे।

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बुधवार को हेस्को और टाइम संस्था की ओर से एफआरआई में आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने यह बात कही। इस दौरान वैज्ञानिक पद्धति से विकास योजनाएं तैयार करने की जरूरत जताई गई।
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हिमाचल स्थित पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसके शर्मा ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में संतुलित और टिकाऊ विकास की जरूरत है, जिससे विनाश और तबाही को रोका जा सके। पर्वतीय राज्यों में खेती, उद्यानिकी पर आधारित रोजगार विकसित करने पर उन्होंने जोर दिया।
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कहा कि विकास की कोशिश में पर्यावरण संरक्षण से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। इससे पहले सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से पहाड़ के लिए तैयार की गई तकनीक को लेकर विचार विमर्श किया गया। इस मौके पर पर्यावरणविद अनिल जोशी सहित विभिन्न संस्थानों के कृषि और वन वैज्ञानिक मौजूद रहे।

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