बस दो साल... फिर दून में नहीं दिखेंगे आवारा कुत्ते
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देहरादून को रैबीज़ फ्री नगर बनाने के लिए कार्ययोजना बना ली गई है। खूंखार व आवारा कुत्तों से निजात मिलने पर लोगों को रैबीज़ का खतरा भी नहीं रहेगा। आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने की पहल नगर निगम के स्तर पर भी शुरू हो गई है। बहुत जल्द पशुओं के लिए अस्पताल भी केदारपुरम में बनकर तैयार हो जाएगा।
दूनवासी आवारा कुत्तों से परेशान हैं। इसके लिए कई सालों से प्रदेश सरकार और नगर निगम प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है। हालांकि अब उसकी नींद टूटने लगी है। कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए सरकार भारी भरकम राशि देने को राजी हो गई है।
एबीसी यानि एनीमल बर्थ कंट्रोल परियोजना पर सैद्धांतिक तौर पर सरकार, नगर निगम एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया सहमत हो गए हैं।
शासन से मिली योजना के लिए धन की अनुमति
नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया का कहना है कि शासन धन देने के लिए तैयार हो गया है। अब जब भी धन आवंटित होगा तो मिशन रूप में काम चालू हो जाएगा। हम जयपुर मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसका परिणाम तब दिखेगा जब हम सत्तर प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।
नगर निगम के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वी सती का कहना है कि मादा कुत्तों की नसबंदी इनकी आबादी रोकने का सबसे कारगर उपाय है। इसलिए बहुत बड़े स्केल पर काम करने पर ही असर जमीन पर दिखेगा। हम सीएनटीवीआर फार्मूले पर काम कर रहे हैं। कैच, न्यूट्रलाइज, ट्रीट, वैक्सीनेट व रिलीज आधार पर हम काम करेंगे। उन्होंने बताया कि इसमें कायदे के स्वयंसेवी संगठनों को साथ जोड़ा जाएगा।
खास बातें
-हर आपरेशन में तीन-तीन सौ रुपये नगर निगम व राज्य सरकार और एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया 222 रुपये खर्च करेंगे।
- अगले 2 वर्ष में 70 फीसदी मादा कुत्तों की आबादी टारगेट करने का लक्ष्य।
- रैबीज़ की आशंका पर अंकुश लगेगा।
- रैबीज मुक्त नगर बनाने का लक्ष्य।
- छोटे श्वानों की दर्दनाक मौतों में आएगी कमी।
- हिंसक कुत्तों की संख्या में भी अपेक्षित कमी आएगी।