दुनिया छोड़ने के बाद भी छह लोगों को जिंदगी दे गईं गीता, आप भी ऐसे कर सकते हैं ये नेक काम
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पिथौरागढ़ की गीता देवी ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन जाते-जाते वह छह लोगों को जीवनदान दे गईं। नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में सोमवार की रात गीता ने अंतिम सांस ली।
गीता के अंतिम सांस लेने के पहले ही उसके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को अंगदान करने संबंधी गीता की अंतिम इच्छा बता दी थी। इस पर अस्पताल प्रशासन ने अंग प्रत्यारोपण के संबंध में सारी तैयारी कर ली। फिर जब गीता की सांसें थम गईं तो उनके अंगों को दूसरे मरीजों में सफलता पूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया गया।
पिथौरागढ़ के बडादे (बडालू) निवासी गीता को कई दिन पहले सिरदर्द और चक्कर आए। बेहोशी छाने लगी तो सरकारी अस्पताल में ले गए। वहां से इलाज के लिए पिथौरागढ़ के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया।
वहां भी जब मर्ज समझ नहीं आया तो उनके भाई ने उन्हें नोएडा के जेपी अस्पताल में भर्ती कराया। एक मई की रात गीता की हालत अति गंभीर हो गई। इसके बाद जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सकों की टीम ने दो बार जांच के बाद मरीज का ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
मरीज का ब्रेन डेड घोषित हो जाने के बाद परिवार वालों की सहमति ली गई और उसके बाद मरीज के छह अंगों को छह लोगों में प्रत्यारोपित कर दिया गया। मरीज का लीवर यूपी के हापुड़ निवासी 42 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया।
एक किडनी दिल्ली के द्वारका निवासी 35 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित की गई। लीवर ट्रांसप्लांट डॉ. अभिदीप चौधरी और किडनी ट्रांसप्लांट डॉ. अमित देवरा की टीम ने किया।
इसके साथ ही राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण संस्थान के नियमानुसार मरीज के दिल को साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल एवं दूसरी किडनी वैशाली स्थित मैक्स हॉस्पिटल की शाखा को दान कर दी गई।
20 मिनट में फिर धड़कने लगा गीता का दिल
मरीज की कार्निया को भी सरकारी नेत्र बैंक में दान दे दिया गया। जेपी अस्पताल के सीईओ डॉ. मनोज लूथरा ने बताया कि मरीज गीता और उनके परिजन बधाई के पात्र हैं।
उन्होंने सफल प्रत्यर्पण पर अस्पताल के चिकित्सकों को भी बधाई दी। गीता के भाई महेंद्र कुमार जोशी का कहना है कि उन्हें आज अपनी बहन पर गर्व महसूस हो रहा है। शादी के करीब डेढ़ साल बाद पति की मौत हो गई थी। कोई बच्चा नहीं था। वह मायके में ही रहती थी।
गीता का हार्ट ट्रांसप्लांट करने के लिए बाकायदा जिला प्रशासन की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। गीता के दिल को सुबह 6:30 बजे जेपी हॉस्पिटल से 32 किलोमीटर दूर साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल ले जाने में 20 मिनट का समय लगा। 20 मिनट बाद गीता का दिल दूसरे मरीज में धड़कने लगा। दूसरी किडनी को सुबह 7:30 बजे करीब 23 किलोमीटर दूर वैशाली स्थित मैक्स हॉस्पिटल ले जाने में करीब 18 मिनट का समय लगा।
इन अंगों का कर सकते हैं दान
हमारे देश में लिवर, किडनी और हार्ट के ट्रांसप्लांट की सुविधा है। कुछ मामलों में पैनक्रियाज भी ट्रांसप्लांट हो जाते हैं, लेकिन इनके अलावा दूसरे अंगों का भी दान किया जा सकता है। अंदरूनी अंग जैसे- गुर्दे, दिल, लिवर, पैनक्रियाज, छोटी आंत और फेफड़े। त्वचा, बोन और बोन मैरो, आंखें आदि।
कौन कर सकता है अंगदान
कोई भी शख्स अंगदान कर सकता है। वैसे 90 साल तक की उम्र के बुजुर्गों के अंगदान कामयाब हुए हैं। अगर कोई शख्स 18 साल से कम उम्र का है तो उसे अंगदान के लिए फ ॉर्म भरने से पहले अपने मां-बाप की इजाजत लेना जरूरी है।
ऐसे होता है अंगदान
जिन लोगों की ब्रेन डेथ हो जाती है, उन्हें डॉक्टर वेंटिलेटर्स पर ले लेते हैं। फि र डॉक्टरों का एक पैनल इस बात की पुष्टि करता है कि उसकी ब्रेन डेथ हो चुकी है। कुछ समय बाद एक बार फि र उसकी पुष्टि की जाती है। इसके बाद घरवालों की इच्छा से और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मरने वाले के शरीर से अंगों को निकाल लिया जाता है। यह प्रक्रिया व्यक्ति मरने के तुरंत बाद शुरू कर दी जाती है।
अंगदान के बारे में यह भी जानें
-ज्यादातर अंगदान तब होते हैं, जब इंसान की मौत हो जाती है। लेकिन कुछ अंग और टिशू इंसान के जिंदा रहते भी दान किए जा सकते हैं।
-जीवित लोगों द्वारा दान किया जाने वाला सबसे आम अंग है किडनी। दान करने वाला शख्स एक ही किडनी के साथ सामान्य जिंदगी जी सकता है। वैसे भी
जो किडनी जीवित शख्स से लेकर ट्रांसप्लांट की जाती है, उसके काम करने की क्षमता उस किडनी से ज्यादा होती है, जो किसी मृत शरीर से लेकर लगाई जाती है।
-घर पर होने वाली सामान्य मौत के मामले में सिर्फ आंखें दान की जा सकती हैं। बाकी कोई अंग नहीं लिए जा सकते। बाकी कोई भी अंग तब लिया जा सकता है, जब इंसान की ब्रेन डेथ होती है और उसे वेंटिलेटर या लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ले लिया जाता है।
-सामान्य मौत और ब्रेन डेथ में फ र्क होता है। सामान्य मौत में इंसान के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं। उसके दिल की धड़कन रुक जाती है। शरीर में खून का बहाव रुक जाता है। ऐसे में आंखों को छोड़कर जल्दी ही उसके सभी अंग बेकार होने लगते हैं। आंखों से कार्निया ही ली जाती है।
-ब्रेन डेथ वह मौत है, जिसमें किसी भी वजह से इंसान के दिमाग को चोट पहुंचती है। इस चोट की तीन मुख्य वजहें हो सकती हैं, सिर में चोट, ब्रेन ट्यूमर और स्ट्रोक। ऐसे मरीजों का ब्रेन डेड हो जाता है लेकिन बाकी अंग ठीक काम कर रहे होते हैं।
-आंखों के अलावा बाकी सभी अंगों का दान ब्रेन डेड होने पर ही किया जा सकता है।