पिघल रहे हैं ग्लेशियर, खतरे में लोग
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दो दिन पूर्व हुई मूसलाधार बारिश और उमस भरी गर्मी से तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर से उत्तराखंड में पिंडर नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है।
कर्णप्रयाग संगम पर स्नानघाट की सीढ़ियों तक पानी पहुंच चुका है लेकिन प्रशासन और नगर पंचायत की ओर से सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं।
बीते वर्ष आपदा के बाद से पिंडर नदी के स्पान में कई स्थानों पर वृद्धि हुई है। बीते दो दिन पूर्व पिंडरघाटी और कर्णप्रयाग में हुई तेज बारिश से पिंडर नदी के पानी में और भी इजाफा हुआ है। नदी का रंग अब मैटमैला है।
खतरे की आशंका बनी
बरसात से पूर्व ही संगम में नदी का जलस्तर स्नानघाट की सीढ़ियों तक पहुंच गया है, जबकि नदी से सीढ़ियों की दूरी दो मीटर से अधिक है।
सीढ़ियों पर लगे पाइप पानी में डूबे हैं। स्नानघाट के किनारे की मुंडेर तक नदी का पानी पहुंच रहा है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं।
गंगा सफाई अभियान के संयोजक उद्धव प्रसाद देवली का कहना है कि यात्रा के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोग काफी संख्या में संगम पर पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से खतरे की आशंका बनी है।
प्रशासन और नगर पंचायत को कई बार इस संबंध में अवगत कराने के बाद भी कोई समस्या के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है।
यहां भी बढ़ रहा खतरा
पिंडर और अलकनंदा नदी किनारे बसे नारायणबगड़, नलगांव, बगोली, नौली, सिमली, कर्णप्रयाग के सुभाष नगर और पोखरी पुल, कालेश्वर, लंगासू आदि स्थानों पर आपदा के बाद से सुरक्षा कार्य नहीं हुए हैं। ऐसे में नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थानों पर खतरा बना है।
संगम में निरंतर जलस्तर में वृद्धि हो रही है, जो चिंता का विषय है। नगर पंचायत को जरूरी सुरक्षा के लिए निर्देशित किया जा रहा है।
- कुश्म चौहान, एसडीएम कर्णप्रयाग।
संगम स्थित स्नानघाट पर सुरक्षा व्यवस्था प्रशासन के सहयोग से हो सकती है। नगर पंचायत में जो भी सुरक्षा कार्य प्रस्तावित हैं, उसमें कई प्रगति पर हैं। - एसपी भट्ट, ईओ नगर पंचायत कर्णप्रयाग।