चारधाम यात्रा: नहीं लौट रही मार्गों पर रौनक
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सोनप्रयाग से ऊपर केदारनाथ धाम तक पैदल मार्ग में खाने-रहने जैसी जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम होने के बाद भी काफी कम यात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
यात्रा मार्ग में किसी तीर्थयात्री की तबीयत बिगड़ जाने की स्थिति में उसे समय से गुप्तकाशी लाने के लिए हेलीकाप्टर की व्यवस्था भी प्रशासन ने की है।
पिछले वर्षों तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती थी। यात्री अपने भरोसे ही यात्रा पर आते थे। सुविधाओं के बावजूद इस बार छह दिन में सिर्फ 2662 लोगों ने केदार धाम के दर्शन किए, जबकि पिछले वर्षों तक तीर्थयात्रियों का आंकड़ा कई गुना होता था।
यात्रा पर आपदा की काली छाया
पिछले वर्ष आई आपदा ने धाम सहित पैदल मार्ग का भूगोल बदल दिया है, जहां सड़क और होटल-लॉज थे, वहां अब मलबा है। पैदल मार्ग पर रामबाड़ा ठीक बीच में पड़ता था।
यहां दर्शन करने जा रहे और लौट रहे तीर्थयात्री रुकते थे। लेकिन अब यहां कुछ भी नहीं है। जंगलचट्टी, भीमबली के ढाबे भी बंद हैं। तीर्थ पुरोहित विष्णुकांत शुक्ला का कहना है कि सरकार यात्रियों को चाहे मुफ्त में कितनी सुविधा दे दे, इसका लाभ नहीं होगा।
यात्रा को बढ़ाने के लिए सरकारी मशीनरी के बजाय लोकल लोगों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए। धाम में पूर्व की भांति पूजा-प्रसाद की थालियां और निजी धर्मशालाओं में यात्रियों की रुकने की व्यवस्था हो जाए तो यात्रियों का विश्वास जीता जा सकता है।
गंगोत्री-यमुनोत्री: सिर्फ 5 हजार तीर्थयात्री
चारधाम यात्रा पर आपदा की काली छाया दिखने लगी है। यात्रा को एक सप्ताह का समय बीतने के बाद भी अभी तक मात्र पांच हजार यात्री ही गंगोत्री-यमुनोत्री पहुंच पाए जबकि बीते साल एक हफ्ते में 81 हजार यात्री इन दोनों धामों के दर्शन कर चुके थे।
यात्रियों के न पहुंचने से धाम और यात्रा पड़ावों पर चहल-पहल नहीं दिखाई दे रही है। यहां अभी भी कई दुकान, ढाबे और होटल बंद हैं।
गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव उत्तरकाशी, नेताला, भटवाड़ी, गगनानी, हर्षिल, धराली और गंगोत्री धाम में अभी कई होटल, धर्मशालाएं बंद हैं। यही हाल यमुनोत्री धाम के खरादी, जानकीचट्टी सहित अन्य पड़ावों की हैं।
बदरी धाम पहुंचे सबसे अधिक यात्री
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के छह दिनों के भीतर 16 हजार 122 तीर्थयात्री बदरीनाथ के दर्शनों को पहुंचे हैं। बीते वर्ष की तुलना में तीर्थयात्रियों की यह संख्या कई गुना कम है।
पिछले वर्ष छह दिनों में धाम पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 85,423 थी। इस बार धाम के कपाट खुलने के दिन धाम में करीब पांच हजार तीर्थयात्री पहुंचे थे। वहीं बीते वर्ष कपाट खुलने के दिन ही 15,746 तीर्थयात्री धाम में अखंड ज्योति के दर्शन को पहुंचे थे।
पाई-पाई को मोहताज व्यवसायी
तीर्थयात्रियों के न आने से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यात्रा से अपनी आजीविका चलाने वाले व्यवसायियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है।
उत्तरकाशी शहर की प्राचीन बाबा कालीकमली धर्मशाला के प्रबंधक अरुण कुमार झा कहते हैं कि वे 2003 से धर्मशाला में हैं, लेकिन पहली बार कपाटोद्घाटन के बाद इतने कम यात्री देखे हैं। 300 से अधिक यात्री क्षमता वाली उनकी धर्मशाला में अभी तक मात्र 70 से 80 यात्री ठहरे हैं।
सरकार को ठहरा रहे जिम्मेदार
होटल एसोसिएशन अध्यक्ष अजय पुरी कहते हैं कि उनकी एसोसिएशन से करीब 150 होटल व्यवसायी जुड़े हैं। हर व्यवसायी यात्रा सीजन में 5 से 20 हजार रुपये प्रतिदिन कमा लेता था, लेकिन इस बार व्यवसायी पाई-पाई के लिए मोहताज हैं।
इसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार हैं। सरकार यदि समय पर सड़क सहित अन्य बुनियादें सुविधाएं जुटा देती तो ऐसे हालात नहीं होते।
चारधाम यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे पर डामरीकरण का कार्य चल रहा है। चारों धाम में हर रोज यात्री पहुंच रहे हैं।
-सीएस नपल्च्याल, गढ़वाल आयुक्त।