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चारधाम यात्रा: तीर्थयात्रियों की जान को हो सकता है खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Wed, 24 May 2017 10:34 PM IST
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गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ है। यमुनोत्री धाम में आ रहे तीर्थयात्रियों का स्वास्थ्य महज एक एमबीबीएस डाक्टर के भरोसे चल रहा है।
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सीएचसी व पीएचसी अस्पतालों में विभिन्न रोगों से संबंधित विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। स्वास्थ्य की लचर व्यवस्था यात्रियों की जान पर भी भारी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने गंगोत्री धाम के अलावा गौमुख मार्ग पर चीड़वासा व तपोवन में ऑक्सीजन सिलेंडर व औषधि वितरण के लिए कुल चार एफएमआर(फर्स्ट मेडिकल रिस्पांस) टीम तैनात की है।
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जबकि यमुनोत्री धाम में जानकीचट्टी के साथ ही यमुनोत्री पैदल मार्ग पर हर डेढ़ किमी की दूरी पर एक एफएमआर टीम ऑक्सीजन सिलेंडर व जरूरी जीवनरक्षक दवाईयों के साथ तैनात है।
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जानकीचट्टी में एक एमबीबीएस डाक्टर भी तैनात है। इसके साथ ही जानकीचट्टी में अलग से स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित किया गया है जहां हर रोज यात्रा पर आने वाले 50 वर्ष से अधिक उम्र के यात्रियों का स्वास्थ्य संबंधी चेकअप किया जाता है।
हार्ट अटैक से हो रही अधिकांश मौतें
जांच केंद्र में शुगर व बीपी से पीड़ित मरीजों को यमुनोत्री धाम न जाने की सलाह दी जाती है। हालांकि यात्री कई बार नकारात्मक जांच के बावजूद आस्था के बल पर धाम दर्शन को पहुंचते हैं जिसके चलते यमुनोत्री धाम में हृदयघात से सबसे अधिक यात्रियों की मौत की घटनाएं भी सामने आ रही है।
अभी तक यमुनोत्री धाम में 16 यात्रियों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। हालांकि लचर स्वास्थ्य सेवाएं भी इसके लिए जिम्मेदार है। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर डेढ़ किमी की दूरी पर ऑक्सीजन सिलेंडर व जीवनरक्षक दवाईयों वाली एफएमआर टीम होने के बावजूद यात्रियों को समय पर इलाज न मिलने से वह दम तोड़ रहे।
इसके अलावा अस्पतालों में विभिन्न रोग से संबंधित विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के कारण भी यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही। सीएमओ डा. कल्पना गुप्ता का कहना है कि विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले इस क्षेत्र में बाहर से आने वाले यात्रियों का हृदय घात से मौत सामान्य घटना कही जा सकती है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर है।
यात्रा से जुड़े सभी पड़ावों पर सीएचसी व पीएचसी के साथ ही एडिशन अस्पताल व एंबुलेंस की व्यवस्था है। बाहर से आने वाले यात्री यहां के मौसम के अनुसार आसानी से ढल नहीं पाते हैं। दूसरे राज्यों में अधिक गर्म है। जबकि यहां धामों में काफी हद तक तापमान कम है। हार्ट अटैक का कारण हीमोग्लोबिन का असंतुलन भी है।
अभी तक यमुनोत्री धाम में 16 यात्रियों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। हालांकि लचर स्वास्थ्य सेवाएं भी इसके लिए जिम्मेदार है। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर डेढ़ किमी की दूरी पर ऑक्सीजन सिलेंडर व जीवनरक्षक दवाईयों वाली एफएमआर टीम होने के बावजूद यात्रियों को समय पर इलाज न मिलने से वह दम तोड़ रहे।
इसके अलावा अस्पतालों में विभिन्न रोग से संबंधित विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के कारण भी यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही। सीएमओ डा. कल्पना गुप्ता का कहना है कि विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले इस क्षेत्र में बाहर से आने वाले यात्रियों का हृदय घात से मौत सामान्य घटना कही जा सकती है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर है।
यात्रा से जुड़े सभी पड़ावों पर सीएचसी व पीएचसी के साथ ही एडिशन अस्पताल व एंबुलेंस की व्यवस्था है। बाहर से आने वाले यात्री यहां के मौसम के अनुसार आसानी से ढल नहीं पाते हैं। दूसरे राज्यों में अधिक गर्म है। जबकि यहां धामों में काफी हद तक तापमान कम है। हार्ट अटैक का कारण हीमोग्लोबिन का असंतुलन भी है।