उत्तराखंडः नहीं खुल पाए मार्ग, नौ हजार यात्री अब भी फंसे
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चार धाम यात्रा पर उत्तराखंड के राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक की निगाह है। शनिवार को राज्यपाल ने फंसे हुए यात्रियों के परिजनों को सेटेलाइट फोन से जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
प्रदेश सरकार ने प्रभावित जिलों में कुछ अधिकारियों को तीन माह केलिए विशेष रूप से तैनात किया। इसके साथ ही अफसरों को भी जिलों का जिम्मा दिया गया। मौसम विभाग ने बरसात से राहत का संकेत दिया है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बदरीनाथ के लिए छोटे वाहनों का काफिला भी रवाना किया गया है।
राजभवन ने शनिवार को जिलाधिकारियों से लेकर मंडलायुक्त तक से बचाव कार्य की जानकारी ली। राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पॉल ने सेटेलाइट फोन केजरिए संचार व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश सरकार को दिया। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी बचाव कार्य और चार धाम यात्रा की समीक्षा की।
बताया गया कि प्रभावित जिलों में सचिवों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। देर शाम शासन ने कुछ अधिकारियों को तीन माह केलिए प्रभावित जिलों में विशेष रूप से तैनात करने का आदेश जारी किया। मौसम विभाग ने भी अब बरसात से राहत के संकेत दिए हैं।
अगले कुछ दिन हालात रहेंगे सामान्य
मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक अगले कुछ दिन हालात सामान्य रहेंगे। कंट्रोल रूम के मुताबिक बदरीनाथ मार्ग और केदारनाथ मार्ग नहीं खुल पाया। करीब नौ हजार यात्री इन स्थानों पर फंसे हुए हैं। यात्रियों को हेलीकॉप्टर से निकालने की कार्यवाही शनिवार को भी की गई।
रावत ने अरुण जेटली को लिखा पत्र
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली को पत्र लिखकर 2013 की आपदा से प्रभावित जिलों में सेवाकर और कर्ज पर ब्याज माफ करने का आग्रह किया है। रावत ने केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा है कि रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथारौगढ़ के लोगों को आपदा के कारण खासा नुकसान उठाना पड़ा है।
लोगों का पर्यटन व्यवसाय, भवन, होटल, दुकान, कृषि भूमि, फसलों का खासा नुकसान उठाना पड़ा है। इनके बैंक ऋण पर लगे रहे ब्याज को 2013-14, 2014-15 और 2015-16 के लिए माफ कर दिया जाए तो लोग कम से कम मूल लौटाने में सफल हो पाएंगे।