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उत्तराखंड में भी फैलिन से मचा 'कोहराम'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 15 Oct 2013 08:24 AM IST
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ओडिशा और आंध्र प्रदेश में आई फैलिन ने उत्तराखंड को भी प्रभावित किया है। इस चक्रवात ने राज्य में विपक्ष को सरकार पर हमले का एक और मौका दे दिया है।
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इतनी बड़ी संख्या में न हुई होती मौतें
जितनी सतर्कता फैलिन से बचने के लिए वहां की सरकारों ने बरती, ऐसी ही सतर्कता उत्तराखंड सरकार ने बरती होती तो इतनी बड़ी संख्या में मौतें न हुई होतीं। ऐसा नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट मानते हैं।
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उनका कहना है कि आपदा को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर ही नहीं रही। न आपदा आने से पहले और न आपदा खत्म होने के बाद। 16-17 जून को आई आपदा से पहले राज्य के मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया था।
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लेकिन हमारी सरकार और सरकारी तंत्र हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
गंभीरता से उसे लिया ही नहीं। जिसके चलते हजारों मौतें हुईं। अभी भी सैकड़ों लोग बेघर होकर धक्के खा रहे हैं। सरकार उनके रहने को मकान की व्यवस्था नहीं कर पाई है। सड़कें बुरी तरह क्षत-विक्षत हैं।
लोगों का जीवन अब तक सामान्य नहीं हो पाया है।
मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लिया
जबकि ओडिशा और आंध्र प्रदेश सरकारों ने मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लेकर लाखों लोगों की जान-माल की रक्षा की। भट्ट के इस बयान के साथ ही अब जून में आई आपदा पर नई बहस की शुरुआत हो रही है।
क्या वास्तव में आपदा में मरे हजारों लोगों की जान सरकार बचा सकती थी? अब तक सरकार और सरकारी तंत्र यही कहते रहे कि जिस तरह का जल प्रलय था, उसमें कोई कुछ भी करने की स्थिति में नहीं था।
गौर करने की जरूरत
किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि इतनी बड़ी आपदा आ सकती है। लेकिन ओडिशा और आंध्र प्रदेश में जितनी सतर्कता बरतते हुए लोगों से तटीय क्षेत्र खाली कराए गए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया, क्या इस पर गौर करने की जरूरत नहीं है?
विपक्ष को एक मुद्दा मिल गया, विशेषज्ञों के लिए भी उत्तराखंड और ओडिशा का समानांतर अध्ययन करने का विषय मिल गया है।
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