पर्यटकों का 'मजा' बना स्थानीय लोगों के लिए सजा

अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 21 Jan 2014 12:09 PM IST
people suffer from power cut in mussoorie
बर्फबारी के बाद भले ही मसूरी पर्यटकों के लिए पहाडों की रानी हो, लेकिन वहां के बाशिंदों के लिए यह बर्फ परेशानी का सबब बन गई है।

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जहां एक तरफ बाहर से आने वाले लोग बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं वहीं स्थानीय लोग बिजली और पानी के लिए तरस रहे हैं।

पीने के पानी को तरसे लोग
मसूरी में बर्फबारी के तीन दिन बाद भी लोग बिजली-पानी के लिए तरस गए। बर्फ पिघलाकर पीने के पानी का इंतजाम किया जा रहा है। हालांकि, सोमवार को जल संस्थान ने कुछ स्थानों पर टैंकरों से पानी की सप्लाई की।

लेकिन अधिकतर इलाके सड़क और संपर्क मार्ग से दूर हैं। ऐसे स्थानों पर बर्फ में पाला जमने से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में पानी ढोने में दिक्कत हो रही है। मसूरी का टिहरी, चंबा, उत्तरकाशी, नैनबाग से संपर्क कट गया है।

अंधेरे में ये इलाके

पहाड़ों की रानी में 18 जनवरी को हुई बर्फबारी के बाद रविवार रात करीब 9 बजे लाइब्रेरी, कुलड़ी बाजार, हुसैनगंज और लंढौर के कुछ हिस्सों में बिजली की आपूर्ति सुचारु हुई है।

बार्लोगंज, कंपनी बाग क्षेत्र, हाथीपांव, चंडालगढ़ी, हैप्पी वैली, इंदिरा कालोनी, झड़ीपानी आदि इलाकों में बिजली नहीं आई है। बिजली नहीं होने से नौनिहालों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

ठिठुर-ठिठुर कर गुजार रहे रात
नगर में भारी हिमपात के बाद दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बर्फीली हवाओं को झेलना लोगों के कष्टकारी हो रहा है। बिजली नहीं होने से हीटर इत्यादि विद्युत उपकरण शोपीस बन गए हैं। 18 जनवरी को शाम लगभग साढ़े तीन बजे बर्फबारी थम गई थी।

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उस दिन एसडीओ सुनील गैरोला ने बताया कि शाम तक बिजली की आपूर्ति हो जाएगी लेकिन तीन दिन गुजर गए स्थिति जस की तस है।

कहां हैं रिजर्ववायर
तीन दिन से पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद लोगों का कहना है कि गनहिल, राधा भवन इस्टेट, नानपारा समेत विभिन्न स्थानों पर कई लाख लीटर पानी के भंडारण से जल की आपूर्ति क्यों नहीं की जा रही है?

ऑफ सीजन में कम से कम तीन दिन तक इन रिजर्ववायरों से नगर को पानी पिलाया जा सकता था। जल संस्थान के अभियंताओं का तर्क है कि बिजली नहीं होने से पंपिंग स्टेशन ठप हैं। लेकिन रिजर्ववायर से पानी की सप्लाई पर खामोश हैं। फोन भी रिसीव नहीं किया जा रहा है।

पाले पर चलना खतरनाक
बर्फबारी के बाद चटख धूप खिलने और रात के समय नीले आसमान में पाला गिरने से बर्फ जम गई है। पाले में चलना खतरे से खाली नहीं है। खासकर शेडो जोन में बर्फ के ऊपर पाले पर वाहन चलाना और पैदल चलना खतरनाक है।

बर्फबारी देखने वालों का तांता
शनिवार को बर्फबारी के बाद देश भर से लोग मसूरी चले आ रहे हैं। हालांकि शनिवार और रविवार को रास्ता बंद होने की वजह से सैनाली पहाड़ों की रानी नहीं पहुंच पाए लेकिन सोमवार को रास्ता खुलते ही यहां के पर्यटन स्थल गुलजार हो गए।

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कंपनीबाग, लोगी गार्डन, टिहरी बाईपास और लाल टिब्बा इलाके में बर्फबारी का लुत्फ लेने के लिए काफी संख्या में सैलानी पहुंचे। पर्यटकों ने बर्फ के गोले बनाकर खूब अठखेलियां की।

कैसे पता चले, कितनी पड़ी बर्फ...
सर्द मौसम में पहाड़ पर चांदी का दृश्य हर किसी को भाता है। लेकिन अगर आप यह जानना चाहें कि आपके प्रिय पर्यटन स्थल मसूरी, चकराता आदि स्थानों पर कितनी बर्फबारी हुई है तो आपको निराश होना पड़ेगा।

इसकी वजह यह है कि प्रदेश में केवल चार ऑब्जरवेटरी हैं, जिनमें से दो जगह बर्फ पड़ती ही नहीं। शेष दो जगहों में एक गढ़वाल और एक कुमाऊं में है।

अभी जिन जगहों पर आब्जरवेटरी है, उनमें मुक्तेश्वर, टिहरी, देहरादून और पंतनगर शामिल हैं। दून और पंतनगर में बर्फ नहीं गिरती। केवल मुक्तेश्वर और टिहरी का ही आंकड़ा मौसम विभाग के पास होता है। अन्य स्थानों की बर्फबारी के आंकड़ों के लिए वह तहसीलों से मिलने वाले डाटा पर निर्भर होता है।

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सूत्रों के अनुसार अगर बर्फबारी शनिवार शाम या रविवार को होती है तो डाटा मिलने में दो दिन लग जाते हैं। यही वजह थी कि इस बार मसूरी में 12-14 साल बाद बर्फ पड़ी तो इसका माप जानने की इच्छा रखने वालों को स्थानीय निवासियों की याददाश्त और काबिलियत पर भरोसा करना पड़ा।

सूत्र बताते हैं कि टिहरी में दो ऑब्जरवेटरी थी, जिनमें से एक तकरीबन पांच साल पहले बंद हो गई।

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