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अब लोगों को भाने लगी दूर की ससुराल
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 04 Feb 2017 12:26 PM IST
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Marriage
लोगों को अब दूर की ससुराल भाने लगी है। पहले लोग अपने गांव-क्षेत्र में ही बेटा-बेटियों का ब्याह करना अधिक पसंद करते थे। लेकिन अब दूसरे जिलों और प्रांतों में शादी करने की स्वीकार्यता बढ़ गई है।
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इसके साथ ही कई कुरीतियां दम तोड़ रही हैं। यह सामाजिक परिवर्तन पिछले 60 सालों में आया है। शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ने से लोगों की सोच और नजरिया बदला है। एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के सर्वे में इस बदलाव का खुलासा हुआ है।
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एएसआई के क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने उत्तराखंड में लाखामंडल, उत्तरप्रदेश में जौनपुर जिले की किराकत तहसील के सेनापुर गांव और हिमाचल प्रदेश में नालागढ़ तहसील के महाशा टिब्बा गांव को मॉडल बनाकर इन क्षेत्रों में सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन किया है।
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करीब 60 साल पहले लखनऊ विवि के प्रोफेसर डीएन मजूमदार और मॉरिस ऑपलर ने सामाजिक बदलाव के संबंध में अध्ययन किया था। इन दोनों अध्ययनों को जब देखा गया तो सामाजिक बदलाव की स्थिति उभर कर सामने आई।
एएसआई के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी डॉ. हर्षवर्धन की अगुवाई में डॉ. करुणा शंकर पांडेय, वंदना कुमारी, आनंद शरण, डीएस हुड्डा ने विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि सामाजिकता में सबसे अधिक दिलचस्प बदलाव शादी-ब्याह को लेकर आया है।
लोगों ने शिक्षा हासिल की तो सोच का दायरा बढ़ा और लोगों में क्षेत्र के बाहर शादियों की स्वीकार्यता बढ़ी। बहुपति विवाह का चलन भी कम हुआ। इस सामाजिक मिलन से छुआछूत सरीखी कई कुरीतियां खत्म होने लगीं। शहरीकरण और औद्योगिकीकरण बढ़ने से लोगों में आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ी।
काम का दायरा बढ़ा तो एकाकी परिवार की व्यवस्था वजूद में आई, लेकिन संयुक्त परिवारों का इमोशनल बॉंड नहीं टूटा। सर्वे में पाया गया कि सामाजिक कुरीतियां तो दरकीं, लेकिन अपने पारंपरिक खानपान (किचन कल्चर) से लोग अब भी जुड़े हुए हैं।