{"_id":"658f0fe8a1559b2cc904cfa0","slug":"people-in-kunja-grant-never-thought-that-their-house-would-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1032-317883-2023-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: नहीं करते कब्जे की गलती तो देखना न पड़ता आशियाना उजड़ने का दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: नहीं करते कब्जे की गलती तो देखना न पड़ता आशियाना उजड़ने का दर्द
विज्ञापन
Iअतिक्रमणकारियों को भी हो रहा अपनी भूल का एहसासI
कुंजा ग्रांट में लोगों ने कभी नहीं सोचा था की उनका आशियाना ताश के पत्तों की तरह उड़ जाएगा। यहां राज्य निर्माण से पहले ही शक्तिनहर की पटरी पर अवैध कब्जे होने शुरू हो गए थे। शुरुआत में कब्जे कम थे, पर पहले से बसे लोगों को देखकर अन्य लोगों ने भी यहां कब्जा कर मकान बनाने शुरू कर दिए। जब घरों को एक-एक कर तोड़ा जा रहा था, तब लोगों को आशियाना उजड़ने के साथ अपनी गलती का एहसास भी हो रहा था।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कहीं खमोशी थी तो कहीं सिसकियों की आवाज। जब वर्ष 2007-2008 में यूजेवीएनएल को सिंचाई विभाग से परियोजना की भूमि हस्तांतरित हुई तो उसका एक बड़ा भाग अतिक्रमण की चपेट में था। यूजेवीएनएल को भी अतिक्रमण हटाने का बड़ा कदम उठाने में करीब 15 साल का समय लग गया।
आबिदा, रूखसाना, नूर, दिलनाज आदि ने बताया कि वह तो यहां कई सालों से रह रहे थे। एक-एक पैसा जुटाकर अपना आशियाना बनाया था, लेकिन कभी पता नहीं था कि यह आशियाना अपनी आंखों के आगे चकनाचूर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वह ही नहीं आसपास काफी लोग रहे थे। बताया कि जब पिछली बार कार्रवाई हुई तो पता चला कि अब हमारा घर भी नहीं बचेगा।
विज्ञापन
राशिद, अहमद, शमशेर ने बताया कि जिन घरों में हम पैदा हुए और पले बढ़े वह घर ही छिन जाएगा, इसका पता नहीं था। उन्होंने बताया कि अपने घर में सुख और दुख सब देखा था। घर में न जाने कितनी ईद मनी थी। अगर उस समय घर न बनाते तो आज उसके खोने का मलाल न होता।
विज्ञापन
कुंजा ग्रांट में लोगों ने कभी नहीं सोचा था की उनका आशियाना ताश के पत्तों की तरह उड़ जाएगा। यहां राज्य निर्माण से पहले ही शक्तिनहर की पटरी पर अवैध कब्जे होने शुरू हो गए थे। शुरुआत में कब्जे कम थे, पर पहले से बसे लोगों को देखकर अन्य लोगों ने भी यहां कब्जा कर मकान बनाने शुरू कर दिए। जब घरों को एक-एक कर तोड़ा जा रहा था, तब लोगों को आशियाना उजड़ने के साथ अपनी गलती का एहसास भी हो रहा था।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कहीं खमोशी थी तो कहीं सिसकियों की आवाज। जब वर्ष 2007-2008 में यूजेवीएनएल को सिंचाई विभाग से परियोजना की भूमि हस्तांतरित हुई तो उसका एक बड़ा भाग अतिक्रमण की चपेट में था। यूजेवीएनएल को भी अतिक्रमण हटाने का बड़ा कदम उठाने में करीब 15 साल का समय लग गया।
विज्ञापन
आबिदा, रूखसाना, नूर, दिलनाज आदि ने बताया कि वह तो यहां कई सालों से रह रहे थे। एक-एक पैसा जुटाकर अपना आशियाना बनाया था, लेकिन कभी पता नहीं था कि यह आशियाना अपनी आंखों के आगे चकनाचूर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वह ही नहीं आसपास काफी लोग रहे थे। बताया कि जब पिछली बार कार्रवाई हुई तो पता चला कि अब हमारा घर भी नहीं बचेगा।
विज्ञापन
राशिद, अहमद, शमशेर ने बताया कि जिन घरों में हम पैदा हुए और पले बढ़े वह घर ही छिन जाएगा, इसका पता नहीं था। उन्होंने बताया कि अपने घर में सुख और दुख सब देखा था। घर में न जाने कितनी ईद मनी थी। अगर उस समय घर न बनाते तो आज उसके खोने का मलाल न होता।