यहां मोबाइल की घंटी बजने पर बोलते हैं, थैंक्स गॉड!
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सूचना क्रांति के युग में आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां मोबाइल की घंटी बजते ही लोग झूमने लगते हैं और भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं। मोबाइलों को घरों, छतों व पेड़ों पर लटका के रखा जाता है, ताकि सिगनल पकड़ सके।
जी हां यहां बात हो रही है उत्तराखंड में कीर्तिनगर विकास खंड के ढुंडसिर कड़ाकोट क्षेत्र के गांवों की। विकासखंड मुख्यालय से 25 किमी दूर इस क्षेत्र में आज भी संचार व्यवस्था दिवास्वप्न बनी हुई है।
कीर्तिनगर विकास खंड के ढुंडसिर कड़ाकोट क्षेत्र के पारकोट, धारकोट, धार, कोटी थापली सहित करीब 15 गांवों की 10 हजार से अधिक की आबादी संचार व्यवस्था से वंचित है। गांवों में न तो लैंडलाइन (बेस फोन) व्यवस्था है, और ना ही मोबाइल फोन सेवा।
पेड़ों पर लडकाकर रखते हैं मोबाइल
क्षेत्र के ग्रामीण अपने मोबाइल फोन को घर की छत व पेड़ों पर लटका कर रखते हैं। कभी अचानक सिग्नल पकड़ने पर ग्रामीण इस सेवा का लाभ उठाते हैं। ग्रामीण जितेंद्र चौहान बताते हैं के कि कभी अचानक जब पेड़ पर लटक रहे मोबाइल फोन की घंटी बजती है तो ग्रामीण सबसे पहले भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं।
स्थानीय निवासी चंद्रमोहन का कहना है कि क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने सांसद से लेकर जिला दूरसंचार महाप्रबंधक तक गुहार लगाई है लेकिन उसके बावजूद क्षेत्र को मोबाइल सेवा की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
बीएसएनएल के महाप्रबंधक एमपी गुप्ता ने कहा कि उनके पास उपलब्ध टावरों की संख्या सीमित है। प्रत्येक गांव में टावर लगाना संभव नहीं है। क्षेत्र का सर्वे किया जा चुका है। क्षेत्र के समीप चुन्नीखाल में टावर लगाया जा रहा है। यदि इस टावर से भी सुविधा नहीं मिल पाती तो भविष्य में प्राथमिकता के आधार पर क्षेत्र में टावर लगाया जाएगा।