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उत्तराखंड में सियासी संकटों के बीच एकजुट रही PDF
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 22 Apr 2016 09:42 AM IST
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मंत्री प्रसाद नैथानी
- फोटो : AmarUjala
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सूबे में पिछले एक माह से जारी सियासी संकट के बीच राजनीतिक गलियारों में जहां कई बदलाव देखने को मिले।
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कांग्रेस, भाजपा समेत तमाम राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी का दौर जारी रहा। पार्टी नेताओं के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चला, वहीं तमाम राजनीतिक झंझावात के बीच पीडीएफ मंत्रियों, विधायकों ने एकजुटता ने नई मिसाल पेश की है। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान पीडीएफ मंत्रियों, विधायकों ने सभी कयासों को दरकिनार कर न सिर्फ यह संदेश देने में सफल रहे कि वह अंतत: कांग्रेस के साथ है बल्कि यह संदेश देने में सफल रहे कि किसी भी प्रकार के प्रलोभनों से भी उन्हें डिगाया नहीं जा सकता है।
विधानसभा सत्र के दौरान विगत 18 मार्च को राजनीतिक उठापटक की शुरुआत में ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि पीडीएफ में टूट हो सकती है। भाजपा सांसद सतपाल से जुड़े कई पीडीएफ मंत्री और विधायक कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। पीडीएफ से जुड़े पूर्व मंत्रियों मसलन प्रीतम सिंह पंवार, मंत्री प्रसाद नैथानी, हरीशचंद्र दुर्गापाल और दिनेश धनै के अलावा बसपा के दो विधायकों हरिदास और सरवत करीम अंसारी ने तमाम कयासों को दरकिनार कर न सिर्फ कांग्रेस के साथ मजबूती से जुडे़ रहे। पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के आवास पर पीडीएफ विधायकों की हुई बैठक के बाद विधिवत एलान भी किया गया कि पीडीएफ कांग्रेस के साथ है।
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हालांकि पीडीएफ कांग्रेस से टूटकर कही भाजपा का दामन न थाम लें इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सूत्रों की मानें तो अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर मंत्री प्रसाद नैथानी के रात गुजारने के पीछे यहीं वजह थी। अब जबकि हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटाने के साथ ही बहुमत सिद्ध करने के साथ ही सरकार गठन की राह खोल दी है तो एक बार पीडीएफ विधायकों की महत्ता फिर बढ़ गई है।
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वर्तमान में पीडीएफ विधायक पूरी मजबूती से कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पीडीएफ विधायकों की साथ देने के लिए खुले तौर पर सराहना की है। लेकिन, राजनीति में कुछ भी बदलने में देर नहीं लगती है। रातोंरात राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं। हाईकोर्ट के फैसले के तहत 29 अप्रैल को फ्लोर टेस्ट के दौरान पीडीएफ विधायक आखिरकार किसके साथ खड़े नजर आते हैं यह देखने वाली बात होगी।