आईएफएस बनने के बाद बोला यह युवा अफसर, ऐसे बचाएंगे जंगलों को आग से
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) से शुक्रवार को पासआउट उत्तराखंड कैडर के आईएफएस वैभव सिंह के लिए जंगल एक मुकम्मल दुनिया है और अब उनकी कर्मभूमि भी। अक्सर वह शौक में बड़े भाई अभिषेक सिंह के एनजीओ इफेक्ट के लिए काम करने जंगलों में जाया करते थे। न जाने कब जंगल की दुनिया उनके जेहन में ऐसी रची-बसी कि जुनून बन गई। इसी जुनून ने आज उन्हें भारतीय वन सेवा के सबसे ऊंचे पायदान पहुंचा दिया।
आईजीएनएफए से इस साल पासआउट होने वाले वैभव उत्तराखंड कैडर के अकेले आईएफएस हैं। दून के वसंत विहार में रहने वाले उनके बड़े भाई अभिषेक इफेक्ट एनजीओ चलाते हैं, जो वन एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए काम करता है। नौ साल से वह संस्था के माध्यम से प्रदेश में वन्य जीवों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं। स्कॉलर्स होम से 12वीं करने के बाद वैभव ने लखनऊ इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक किया। फिर भाई के साथ वन एवं वन्य जीव बचाने में जुट गए।
दूसरे प्रयास में मिली वैभव को मंजिल
दूसरे प्रयास में वैभव ने भारतीय वन सेवा में ऑल इंडिया 36वीं रैंक के साथ परीक्षा पास की। दो साल के प्रशिक्षण के बाद शुक्रवार को वैभव इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी से पासआउट हुए। उनके पिता हरपाल सिंह रेलवे से रिटायर्ड हैं, जबकि मां रीता सिंह गृहिणी हैं।
बेटे के अफसर बनने पर उनका चेहरा खुशी से खिल गया। बड़े भाई डॉ. अभिषेक सिंह का कहना है कि भाई के आईएफएस बनने से वन और वन्य जीवों को बचाने का उनका हौसला और बढ़ गया।
तीन महीने तक फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट के गुर सीखेंगे
वैभव का कहना है कि वह उत्तराखंड के जंगलों को आग से बचाना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें हाल ही में वैन क्रूवर की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी से तीन महीने की क्वीन एलिजाबेथ फेलोशिप मिली है।
जल्द वह कनाडा रवाना हो जाएंगे। वहां तीन महीने तक फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट के गुर सीखेंगे। वैभव को पहली पोस्टिंग रामनगर में मिलेगी।