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नेताओं के एजेंडे में 'नशे के खिलाफ मुहिम' नहीं

Wed, 08 Feb 2017 10:54 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 08 Feb 2017 10:54 AM IST
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party not raising drugs issue in uttarakhand election.
drugs

उत्तराखंड की सत्ता संग्राम की लड़ाई में कूदे भाजपा और कांग्रेस के एजेंडे में नशे के खिलाफ मुहिम को जगह नहीं मिल पाई है। यूकेडी को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल ने नशे के काले कारोबार को मुद्दा नहीं बनाया है। जबकि पंजाब की तर्ज पर उत्तराखंड में भी नशे का कारोबार चरम पर है। बीते साल प्रदेश में पौने पांच करोड़ रुपये कीमत के नशीले पदार्थों की बरामदगी भयावह स्थिति का अंदाज लगाने के लिए काफी है।

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नेपाल, बिहार, पंजाब और यूपी के तस्करों के लिए उत्तराखंड नशे की आपूर्ति का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। पहाड़ी क्षेत्रों से होने वाली आपूर्ति इससे अलग है।
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इससे भी गंभीर बात यह है कि सौदागरों ने ड्रग्स का सेवन करने वाले युवाओं के हाथों में ही नशा बांटने की कमान सौंप दी है। अक्सर वह शिक्षित नौजवान पकड़ में आ रहे हैं, जो नशा करते-करते कब नशा बाजार के एजेंट बन गए, उन्हें पता ही नहीं चल पाया।
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बरेली के तीन बड़े नेटवर्क ध्वस्त हुए तो मेडिकल कॉलेज के कई दर्जन छात्रों के नाम सामने आए। मुख्यमंत्री हरीश रावत प्रदेश में बढ़ते नशा कारोबार कई बार चिंता जता चुके हैं। उनके निर्देश पर पुलिस ने कई बड़े अभियान भी चलाए, लेकिन नशा कारोबार के बड़े मगरमच्छ शिकंजे में नहीं आ सके।

उम्मीद थी कि 2017 के चुनाव में युवाओं को नशे से बचाने के लिए बड़ा मुद्दा बनेगा। भाजपा और कांग्रेस ने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया है। अलबत्ता उत्तराखंड क्रांति दल ने जरूर नशा मुक्त राज्य के संकल्प को अपने घोषणा पत्र शामिल किया है। 

चौंकाने वाली है प्रदेश में नशे की बरामदगी

party not raising drugs issue in uttarakhand election.
एमए गणपति - फोटो : AmarUjala

पुलिस ने 2016 में चार करोड़ 85 लाख रुपये के नशीले पदार्थों की बरामदगी का नया रिकार्ड बनाया है। इनमें स्मैक, चरस, हीरोइन के अलावा नशे की गोलियां और इंजेक्शन शामिल हैं। नशे के सामान के साथ 672 आरोपी पकड़े गए। 2015 में तीन करोड़ 14 लाख और 2014 में दो करोड़ 84 लाख रुपये की कीमत के नशीले पदार्थ की बरामदगी की गई थी। 2015 में 424 और 2014 में 271 आरोपी पकड़े गए थे। आचार संहिता लगने के बाद करीब 34 लाख रुपये कीमत के नशीले पदार्थ बरामद हो चुके हैं।

यह तथ्य सही है कि प्रदेश में नशे का प्रचलन बढ़ा है। उसी लिहाज से पुलिस के अलावा एसटीएफ ने नेपाल, बिहार और यूपी के कई बड़े नशा सौदागरों के नेटवर्क को ध्वस्त कर बरामदगी का प्रतिशत बढ़ाया है। पिछले साल पौने पांच करोड़ रुपये कीमत के नशीले पदार्थ जब्त किए गए। यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। पुलिस कार्रवाई के साथ सामाजिक स्तर पर भी युवाओं को नशे से बचाने के लिए सार्थक पहल की जरूरत है।
-एमए गणपति, पुलिस महानिदेशक

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