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नए परिसीमन से टल जाएगा पंचायत चुनाव

Wed, 27 Nov 2013 08:38 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 27 Nov 2013 08:38 AM IST
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panchayat election will postponed

परिसीमन के जिन्न ने एक बार फिर से उत्तराखंड सरकार के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। यदि नए सिरे से परिसीमन होता है तो पंचायत चुनाव कम से कम पांच माह के लिए टल जाएगा।

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लोक सभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव
ऐसे में लोक सभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव का नंबर आएगा। हालांकि सरकार की ओर से अभी इस मामले में कुछ भी नहीं कहा जा रहा है।

जनगणना के आंकड़े 31 मई 2013 को प्रकाशित हुए थे और सरकार ने फरवरी-मार्च में पंचायतों का परिसीमन करा लिया था।

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पर नए आंकड़े न मिलने के कारण 2001 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ। इसका सबसे बड़ा फर्क ग्राम पंचायतों पर ही पड़ा। पहले सरकार की कोशिश सितंबर तक पंचायत चुनाव कराने की थी पर केदारनाथ में आई आपदा से बात नहीं बनी।
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नतीजा पंचायत चुनाव छह माह के लिए टाल दिया गया। नवंबर में चुनाव कार्यक्रम तय किया गया जिसके मुताबिक जनवरी माह में पंचायत चुनाव होने हैं। लेकिन हाईकोर्ट के ताजे आदेश के बाद तस्वीर बदलती नजर आ रही है।

करीब तीन माह का समय लगेगा
यदि सरकार नए सिरे से परिसीमन करती है तो पंचायत चुनाव फिर टल जाएगा। क्योंकि इसमें करीब तीन माह का समय लगेगा। यह भी संभव है कि पंचायत चुनाव लोक सभा चुनाव के बाद हों।

हालांकि सरकार कोर्ट के इस फैसले को चुनौती भी दे सकती है। लेकिन फिलहाल यही कहा जा रहा है कि एक दो दिन में कोर्ट का फैसला मिल जाने के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा जाएगा।

क्या पड़ेगा फर्क
नए परिसीमन से जिला और ब्लॉक पंचायतों पर खास फर्क भले ही न पड़े पर 500 से लेकर एक हजार तक की जनसंख्या वाले गांवों में वार्डों की संख्या बदल जाएगी।

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इस हिसाब से राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायत विभाग की मशक्कत में भी इजाफा हो जाएगा। मतदाता सूची फिर से तैयार होगी और आरक्षण पर नए सिरे से कवायद होगी।

पेच फंसने की थी संभावना
पंचायत चुनाव का कार्यक्रम फाइनल होने के दौरान ही यह साफ होने लगा था कि नए परिसीमन का पेच इसमें फंस सकता है। इस मुसीबत से बचने के लिए सरकार ने ओबीसी का रैपिड सर्वे भी 2011 की जनगणना के आधार पर कराया। ऐसे में आरक्षण और मतदाता सूची तो जनगणना 2011 के आधार पर ही हुए।

निकाय चुनाव में भी उठा था मुद्दा
निकाय चुनाव के दौरान भी 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने का मुद्दा उठा था। पर उस समय तक जनगणना के आंकड़े प्रकाशित न होने के कारण परिसीमन 2001 की जनगणना के आधार पर हुआ और चुनाव भी इसी आधार पर हुआ।

अब क्या है स्थिति
- सरकार अगर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराती है तो चुनाव करीब पांच माह तक के लिए टल जाएगा। जानकारों की माने तो नए परिसीमन में कम से कम तीन माह का समय लगना तय है।

यही नहीं परिसीमन से 500 से 1000 जनसंख्या वाली पंचायतों में वार्डो की संख्या बदल जाएगी। ऐसे में लोक सभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव संभव है।

- सरकार को फिर से आरक्षण भी तय कराना होगा। एक माह तक का समय इस पूरी प्रक्रिया में लगेगा।
- राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची का फिर से प्रकाशन करना होगा। मतदाता सूची वार्ड आधार पर तैयार होती है और वार्ड बदल जाने के कारण इस सूची का फिर से प्रकाशन जरूरी हो जाएगा।

- पंचायतों का कार्यकाल सरकार को फिर से बढ़ाना पड़ सकता है। चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते-होते मार्च 2014 बीत जाएगा। प्रशासकों का कार्यकाल मार्च माह तक का ही है।

‘2011 की जनगणना से कराएं परिसीमन’
नैनीताल हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर क्षेत्र और जिला पंचायतों का परिसीमन कर आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने ग्राम पंचायतों का परिसीमन भी 2011 की जनगणना के अनुसार फिर से कराने को कहा है।

मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का परिसीमन 2011 की जनगणना के अनुसार ही होना चाहिए।

जबकि सरकार 2001 की जनगणना के अनुसार परिसीमन कर रही है जो असंवैधानिक है। वहीं, सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अपर मुख्य स्थायी वकील परेश त्रिपाठी ने कहा कि परिसीमन का नोटिफिकेशन 2011 की जनसंख्या के आंकड़े प्रकाशित होने के पूर्व कर दिया गया था।


इसलिए राज्य सरकार की कार्यवाही संविधान के अनुरूप है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यह निर्देश दिया है कि 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार ही क्षेत्र और जिला पंचायतों का परिसीमन कराया जाए और ग्राम पंचायतों का परिसीमन भी 2011 की जनगणना के अनुसार फिर से कराया जाए।

इनका ये कहना है
हमने सरकार से पहले ही कहा था कि परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर कराया जाए। कोर्ट ने हमारे तथ्य को स्वीकार किया। तय समय पर चुनाव कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यह पहले ही सोचा जाना चाहिए था।
- मधु चौहान, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष

एक बार नहीं चार बार जनगणना निदेशालय को आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा गया। पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में समय लगता है। जनगणना आंकड़ों के लिए प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता था। इसलिए परिसीमन पुराने आंकड़ों के आधार पर हुआ पर आरक्षण के लिए 2011 की जनगणना का आधार लिया गया।
- सीएस नपलचयाल, अपर सचिव पंचायती राज

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