...तो ‘अयोध्या’ ने रोके पाकिस्तानी जायरीनों के कदम
- 2008 के बाद ऐसा हुआ कि पिरान कलियर में सालाना उर्स को नहीं पहुंचे पाक जायरीन
- अयोध्या फैसले के दिन दरगाह साबिर पाक परिसर में छोटी रोशनी पर छाया रहा सन्नाटा
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आजादी के बाद ऐसा दूसरी बार हुआ, जब पाकिस्तानी जायरीनों के कदम कलियर की पाक धरती पर नहीं पड़े। इससे पहले 2008 में मुंबई हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के चलते जायरीन नहीं आए थे। इस बार इसका कारण अयोध्या प्रकरण पर आए फैसले को माना जा रहा है।
खुफिया सूत्रों की मानें तो अयोध्या में विवादित ढांचे पर फैसला 17 नवंबर से पहले आना था और पाक जायरीनों को नौ नवंबर को यहां पहुंचना था। 13 नवंबर को उनकी वतन वापसी थी। ऐसे में उन्होंने कलियर का रुख न करना ही उचित समझा।
देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं
कलियर में सालाना उर्स में देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं। यहां साबिर पाक से दुआ मांगते हैं। हर साल इन सभी जायरीनों से हटकर आकर्षण का केंद्र होते थे पाकिस्तान से आने वाले जायरीन, लेकिन इस बार तस्वीर जुदा रही।
लोग इसे लेकर तरह-तरह की चर्चा करते नजर आए। उधर, बताया जा रहा है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद खासतौर पर पाकिस्तान के भीतर पर तनाव जैसे हालात हैं। लेकिन इन्हीं सबके बीच अयोध्या पर आए फैसले ने यात्रा पर विपरीत प्रभाव डाला।
छोटी रोशनी की रस्म में दिखा सन्नाटा
आलम तो यह था कि छोटी रोशनी की जिस रस्म पर दरगाह में पैर तक रखने की जगह नहीं रहती थी, उस रस्म पर पहली बार सन्नाटा दिखा। अयोध्या फैसले से ऐन पहले जायरीन अपने घरों को लौट गए थे। खुफिया सूत्रों का कहना है कि भारत पीएम की हवाई यात्रा के लिए पाक द्वारा अनुमति नहीं दिया जाना भी दोनों देश के बीच तनाव का कारण बना हुआ था।
ऐसे में अयोध्या पर फैसले की तारीख के मद्देनजर पाक जायरीन की भारत की डगर और भी कठिन हो गई। जायरीनों के जत्थे के लिए ढेरों आवेदन पहुंचने के बाद वहां कोई नहीं पहुंचा। हालांकि इस बाबत सीओ चंदन सिंह बिष्ट ने बताया कि उर्स में पाकिस्तानी जायरीनों के न आने की क्या वजह रही होगी, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।