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फोटोग्राफी का शौक रखते है तो इनसे मिलेगी प्रेरणा, भारत सरकार ने दिया पद्मश्री

Sat, 26 Jan 2019 02:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 26 Jan 2019 02:33 PM IST
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Padma Shri award photographar Anoop shah
anup sah photography - फोटो : anup sah photography

अगर आप फोटोग्राफी का शौक रखते है तो इनसे प्रेरणा ले सकते हैं। इनकी शानदार फोटोग्राफी के लिए ही भारत सरकार ने इन्हें पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया।

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प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित जाने माने फोटोग्राफर अनूप साह का पूरा जीवन फोटोग्राफी, पर्वतारोहण, पर्यावरण संरक्षण को समर्पित रहा। उनके 3500 से ज्यादा फोटोग्राफ राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में चयनित हुए। करीब 350 फोटो पुरस्कृत हुए। साह छह दुर्गम चोटियों पर सफल आरोहण कर चुके हैं। वह कई ट्रैकिंग अभियानों में शामिल रह चुके हैं। 1970 में 6611 मीटर ऊंची दुर्गम अविजित चोटी नंदाखाट को सर्वप्रथम अनूप ने ही फतह किया था। 
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इसके अलावा ट्रेल पास को भी 53 वर्षों के अंतराल के बाद 2004 में साह ने फतह किया था। साह अत्यंत प्रतिष्ठित आईएमएफ के स्थायी सदस्य और इंडियन इंटरनेशनल फोटोग्राफिक काउंसिल के उपाध्यक्ष भी हैं। इंडो-जापान नंदा देवी संयुक्त अभियान में भी वे शामिल रहे। वह अस्कोट-आराकोट 1990 और 2002 में कैलाश मानसरोवर यात्रा भी कर चुके हैं।
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बेहद सौम्य, शांतचित्त साह का जन्म 1949 में आठ अगस्त को नैनीताल में हुआ था। शिक्षा-दीक्षा भी यहीं हुई। वह उत्तराखंड हिमालय, यहां की वनस्पतियों, जैव विविधता के सही अर्थ में इनसाइक्लोपीडिया हैं। साह समय समय पर उत्तराखंड के बुग्यालों, घाटियों, वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों, संरक्षित जीव-जंतुओं के अवैध शिकार के खिलाफ  लंबी लड़ाई लड़ चुके हैं। 

पिता द्वारा दिए गए कैमरे से शुरू की थी फोटोग्राफी

Padma Shri award photographar Anoop shah
anup sah photography

उन्होंने अपने समाजसेवी पिता स्व. चंद्रलाल साह ठुलघरिया के साथ नैनीताल माउंटेनियरिंग क्लब, 1985 में फ्लोरिस्ट लीग की स्थापना में योगदान दिया। साह के खींचे चित्रों पर राजभवन की कॉफी टेबल बुक सहित राज्य के प्रमुख संस्थानों के दर्जनों कैलेंडर भी बन चुके हैं। पद्मश्री शेखर पाठक के साथ उनकी पुस्तक कुमाऊं हिमालय टेंपटेशन भी प्रकाशित हुई है। 

अनूप साह ने 1964 में अपने पिता द्वारा दिए गए आगफा बॉक्स कैमरे से शौकिया तौर पर फोटोग्राफी शुरू की जो बाद में उनके पर्वतारोहण, जीव-जंतुओं, वनस्पतियों की जानकारी के प्रति शौक के साथ जुड़ कर तेजी से परवान चढ़ी। साह के चित्रों में भी पर्वत शिखरों, प्राकृतिक दृश्यों, जीवों, वनस्पतियों, लोक परंपराओं की अधिकता है। साह नैनीताल के सबसे पुराने विद्यालय सीआरएसटी के प्रबंधक भी हैं। उनके पुत्र प्रांजल भी बेहतरीन फोटोग्राफर हैं। उनको आईआईपीसी ने भारत के सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफर का पदक दिया है।

उनका कहना है कि वह कभी पुरस्कार की दौड़ में शामिल रहे। उन्होंने इसका प्रयास भी नहीं किया। इसके बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। यह पुरस्कार उन्होंने हिमालय के संरक्षण की चिंता से जुड़े लोगों को समर्पित किया है।

हिमालय वासियों को समर्पित करता हूं पुरस्कार : अनूप
भारत सरकार की ओर से मुझे पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। यह मेरे लिए सुखद आश्चर्य था। इतने बडे़ पुरस्कार के लिए मैं कभी प्रयासरत नहीं रहा। मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे इस पुरस्कार के योग्य समझा। हिमालयी समाज, जिसके बीच मैं पर्वतारोहण, ट्रैकिंग और फोटोग्राफी के माध्यम से इन चीजों को दुनिया के सामने लाया और मुझे यह पुरस्कार मिला, मैं हिमालय वासियों को यह पुरस्कार समर्पित करता हूं।

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