Padma Awards 2020 : हजारों की फ्री प्लास्टिक सर्जरी कर चुके हैं डॉ. एरन, अभी भी 10 हजार वेटिंग में
- 83 साल की उम्र में आज भी कायम है उनमें गरीब मरीजों की सेवा का जज्बा
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वयोवृद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. योगी एरन ने ‘डॉक्टर धरती के भगवान होते हैं’ पंक्ति को वास्तव में साकार किया है। जले कटे हजारों मरीजों की निशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कर चुके 83 वर्षीय डॉ. एरन का जज्बा इस उम्र में भी कायम है। वे कहते हैं कि पद्मश्री मिलने से अब उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
उत्तराखंड के डॉ. योगी एरन को चिकित्सा एवं विज्ञान-इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। उत्तराखंड की तीन विभूतियों को पद्म सम्मान दिया जाएगा। जिसमें मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह और पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल प्रकाश जोशी का नाम शामिल है।
डॉ. योगी एरन ने बताया कि वर्ष 1973 में जब वे दून अस्पताल में नौकरी कर रहे थे तो पहाड़ से भालू के खाए हुए और जले हुए कई मरीज पहुंचते थे। वे बहुत ही सीधे और सरल होते थे। कई लोगों के पास पैसे तक नहीं होते थे। उन्हें लगा कि इस तरह के लोगों की मदद होनी चाहिए।
दुनिया के सबसे बड़े प्लास्टिक सर्जन में शुमार रहे डॉ. मिलार्ड के साथ काम किया
दून अस्पताल मेें प्लास्टिक सर्जरी के यंत्र न होने से नौकरी छोड़ दी और अमेरिका जाकर दुनिया के सबसे बड़े प्लास्टिक सर्जन में शुमार रहे डॉ. मिलार्ड के साथ काम किया। वहां देखा कि मरीज तो कम हैं, लेकिन सुविधाएं ज्यादा हैं। वहीं उत्तराखंड में मरीज ज्यादा और सुविधाएं कम हैं। इन सबको लेकर वे परेशान होने लगे तो वे वर्ष 1984 में गरीब मरीजों की सेवा के लिए फिर देहरादून आ गए। मसूरी रोड पर स्थित जंगलों के बीच पहाड़ी पर कुछ जगह ली।
वहां 500 पौधे रोपे और इस जगह को ‘जंगल मंगल’ नाम देकर वहां मरीजों के रहने के लिए भी कमरे बनाए। इसके साथ ही हेल्पिंग हैंड संस्था की स्थापना की और कई साल तक गरीब मरीजों की मुफ्त प्लास्टिक सर्जरी की। वर्ष 2006 में अमेरिका की संस्था को उत्तराखंड के गरीब मरीजों की मदद के लिए राजी किया। तब से अमेरिका के प्लास्टिक सर्जनों की टीम हर साल दो बार अत्याधुनिक उपकरणों के साथ सर्जरी के लिए देहरादून आती है।
10 हजार ऐसे मरीजों की वेटिंग हैं, जिनकी निशुल्क प्लास्टिक सर्जरी होनी है
डॉ. एरन बताते हैं कि वह खुद भी मरीजों की प्लास्टिक सर्जरी करते हैं। जिन्हें उच्चस्तरीय सर्जरी की जरूरत होती है, उनकी सूची तैयार की जाती है। अमेरिका से अत्याधुनिक उपकरणों के साथ आए डॉक्टर उनकी सर्जरी करते हैं। उन्होंने बताया कि अभी भी उनके पास 10 हजार ऐसे मरीजों की वेटिंग हैं, जिनकी निशुल्क प्लास्टिक सर्जरी होनी है।
वर्तमान में वे राजकीय कोरोनेशन अस्पताल में कार्यरत अपने बेटे डॉ. कुश एरन के साथ आईटी पार्क सहस्त्रधारा स्थित अपार्टमेंट में रहते हैं। सहस्त्रधारा रोड स्थित हेल्पिंग हैंड संस्था के कार्यालय में ऑपरेशन करते हैं।
गरीब मरीजों और परिजनों के रहने की निशुल्क व्यवस्था वह जंगल मंगल स्थित कमरों में करते हैं। डॉ. योगी ने बताया कि परिवार ने उनका हमेशा इस काम में साथ दिया है।
चिकित्सा, विज्ञान-इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इन्हें मिला पद्म सम्मान
डॉ. योगी एरन-उत्तराखंड, पद्मावती बंदोपाध्याय-यूपी, डॉ. सुशोवन बनर्जी-पश्चिम बंगाल, डॉ. दिगंबर बेहरा-चंडीगढ़, डॉ. बेंगलोर गंगाधर-कर्नाटक, डॉ. रमन गंगाखेडकर-महाराष्ट्र, सुजॉय गुहा-बिहार, सुधीर जैन-गुजरात, डॉ. लीला जोशी-मध्यप्रदेश, डॉ. रवि कन्नन आर.-असम, डॉ. नरिंदरनाथ खन्ना-उत्तर प्रदेश, नवीन खन्ना-दिल्ली, कट्टुंगल सुब्रमण्यम-केरल, डॉ. अरुणोदय मॉन्डल-पश्चिम बंगाल, डॉ. शांति राय-बिहार, डॉ. केके सरमा-असम,डॉ. गुरदीप सिंह-गुजरात, वशिष्ठ नारायण सिंह-बिहार, डॉ. सांद्रा डेसा सौजा -महाराष्ट्र, प्रदीप थालप्पिल-तमिलनाडु, येशे दोरजी थॉन्गची-अरुणाचल प्रदेश,हरीश चंद्र वर्मा-उत्तर प्रदेश।