माल ढुलाई के खेल से रेलवे में बड़ा घपला
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देशभर के रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों से माल की ढुलाई में बड़ा गोलमाल चल रहा है। लीज होल्डर, रेलवे और वाणिज्य कर विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों का न भेदने वाला गठजोड़ बन गया है। इस गोरखधंधे में न केवल टैक्स की चोरी की जा रही है, बल्कि ट्रेनों में जमकर ओवरलोडिंग की जा रही है।
ओवरलोडिंग से जहां रेलवे को चूना लगता है, वहीं ट्रेन में यात्रा करने वालों की जान को भी जोखिम बढ़ जाता है। सूत्रों का दावा है कि रेलवे के सीनियर इंस्पेक्टर ट्रैफिक (एकाउंट्स) सुनील कुमार बलूनी की खुदकुशी मामले में लीज के कोचों में ओवरलोडिंग ही अहम मुद्दा है। बताते हैं कि बलूनी पिछले कुछ दिनों से लीज होल्डरों पर सख्ती किए हुए थे, जिस वजह से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
ऐसे चल रहा है खेल
ट्रेनों में लीज के कंपार्टमेंट (कोच) होते हैं, जिनमें सामान भेजा जाता है। दिल्ली से दून आने वाली दो ट्रेनों एसी स्पेशल और शताब्दी एक्सप्रेस से लीज होल्डर अपना माल दून भेजते हैं। यह माल दून स्टेशन पर उतारा जाता है। इस माल को दून से हर शनिवार गोरखपुर होते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर जाने वाली ट्रेन में लोड किया जाता है।
एक कंपार्टमेंट में रेलवे केवल चार टन माल रखने की अनुमति देता है, लेकिन लीज होल्डर चार टन से अधिक माल लोड करवाता है। रेलकर्मियों की मिलीभगत से बिना तोले माल कोच में लोड कर दिया जाता है।
चार टन माल के एक चक्कर का किराया 11,991 रुपये बनता है। कोच में क्षमता से अधिक एक टन भी अधिक माल लोड हो तो रेलवे को करीब 3000 रुपये का नुकसान होता है।
ऐसा ही खेल देश के अधिकतर स्टेशनों से
सूत्र बताते हैं कि यह खेल सिर्फ दून में नहीं, बल्कि देश के अधिकतर स्टेशनों पर चल रहा है। दरअसल, दिल्ली से देश के विभिन्न जगहों पर जाने वाली ट्रेनों में माल ले जाने की जगह काफी कम होती है। ऐसे में लीज होल्डर माल को दिल्ली से ऐसे छोटे स्टेशनों पर भेजते हैं, जहां से माल ले जाने की मांग कम होती है और ट्रेनें अक्सर खाली जाती हैं।
यहां से माल सस्ते में आसानी से ठिकाने लगा दिया जाता है। लीज होल्डर इसका दोहरा लाभ उठाता है। एक तो उसे वाणिज्य कर विभाग के कर्मचारियों से मुक्ति मिल जाती है, क्योंकि छोटे स्टेशनों पर अमूमन वाणिज्य कर के कर्मचारी होते ही नहीं हैं।
दूसरे छोटे स्टेशनों पर कोचों में क्षमता से अधिक माल लोड करा दिया जाता है। इस तरह कम किराये में अधिक माल चला जाता है और टैक्स भी नहीं देना पड़ता है। टैक्स और किराया कम लगने से उन व्यापारियों को भी लाभ हो जाता है जिनका माल लीज होल्डर गंतव्य तक पहुंचाते हैं।
बलूनी ने लगाई थी पेनाल्टी
सूत्रों की मानें तो दिल्ली से आया माल मुजफ्फरपुर भेजने के खेल पर सुनील कुमार बलूनी ने कुछ दिनों से सख्ती कर दी थी। कोच में माल लोड करते समय वह चेक करने लगे थे। क्षमता से अधिक माल लोड करने पर उन्होंने जुर्माना लगाना भी शुरू किया था। लीज होल्डर को तय किराये का दोगुना जुर्माना चुकाना पड़ रहा था, लिहाजा वह बौखला गया था।
दिल्ली से चलता है ओवरलोडिंग का धंधा
सूत्रों का दावा है कि ट्रेनों में लीज के कोचों में ओवरलोडिंग का धंधा दिल्ली से ही चल रहा है। दिल्ली में ही रेलवे और उसके विजिलेंस का मुख्यालय है लेकिन उन्हें यह गोरखधंधा नहीं दिखता।
रंगेहाथ क्यों नहीं पकड़ा बलूनी को
सूत्र बताते हैं कि रेलवे का विजिलेंस विभाग ईमानदारी से काम कर रहा था तो उसे बलूनी को रंगेहाथ पकड़ना चाहिए था। रिश्वत लेने वाले को ट्रैप करने में जो सामान्य प्रक्रिया अपनाई जाती है उसका पालन करना चाहिए था। विजिलेंस की जो टीम छापा मारने आई थी, उसने न तो किसी स्थानीय अधिकारी को साथ लिया न ही किसी दूसरे विभाग के अधिकारी को कार्रवाई में शामिल किया। इससे विजिलेंस की पूरी कार्रवाई ही संदिग्ध हो जाती है।
हालांकि कार्रवाई के बाद विजिलेंस ने दून रेलवे स्टेशन मास्टर को मामले का गवाह बनाने को कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने साफ कर दिया था कि कार्रवाई उनके सामने नहीं की गई इसलिए वह गवाह नहीं बन सकते।