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नीट में बाहरी छात्रों ने मारा प्रदेश के होनहारों का हक

Mon, 24 Jul 2017 09:57 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 24 Jul 2017 09:57 AM IST
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outer students get more seats than uttarakhand students
- फोटो : अमर उजाला

एमबीबीएस और बीडीएस दाखिलों की नीट स्टेट काउंसिलिंग ने इस बार उत्तराखंड के होनहारों का हक मार दिया है। पहली बार हुई कॉमन काउंसिलिंग में उत्तराखंड के बजाय बाहरी राज्यों के होनहारों ने ज्यादा सीटों पर कब्जा कर लिया है।

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एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से जारी मेरिट में टॉप-500 में केवल 158 छात्र उत्तराखंड के हैं। पहली बार नीट की कॉमन काउंसिलिंग हो रही है। सोमवार को पहले चरण का एमबीबीएस और बीडीएस का सीट आवंटन हो जाएगा।
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अभी तक राज्य में प्राइवेट कॉलेज उत्तराखंड के छात्रों को प्राथमिकता देते थे। बाहरी राज्यों के दस प्रतिशत छात्रों को ही मौका दिया जाता था। लेकिन इस बार कॉमन काउंसिलिंग के चलते उत्तराखंड में बाहरी राज्यों के होनहारों ने मेरिट पर कब्जा कर लिया है।
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सोमवार को जब सीट अलॉटमेंट होगा तो टॉप-500 तक के होनहारों में से ज्यादातर प्राइवेट कॉलेजों की सीटों पर बाहरी राज्यों के होनहार नजर आएंगे। 

दरअसल, दूसरे राज्यों से आए हुए छात्रों की रैंक और नीट स्कोर यहां के छात्रों के मुकाबले अच्छे हैं। पहले चरण में आवंटित सीटों पर 31 जुलाई तक एडमिशन लेना है। इसके बाद दूसरे चरण की काउंसिलिंग प्रक्रिया आठ अगस्त से शुरू होगी।

कितने छात्रों में कितने उत्तराखंड के, जानिए

outer students get more seats than uttarakhand students
Demo pic
संख्या    उत्तराखंड के होनहार    बाहरी छात्र 
1-100        59             41
101-200        25             75
201-300        24             76
301-400        30             70
401-500        20             80
501-600        24             76

यूपी ने लगाई है रोक
यहां अहम बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश में आयोजित नीट की स्टेट काउंसिलिंग में बाहरी राज्यों के छात्रों की एंट्री पर रोक लगाई गई है। वहां सरकारी के साथ ही प्राइवेट कॉलेजों में भी केवल यूपी के छात्र ही एडमिशन ले सकते हैं।

प्रदेश में कम है फीस 
कई राज्यों में प्राइवेट कॉलेजों की एमबीबीएस फीस 20 से 50 लाख रुपये सालाना है। जबकि, इसके मुकाबले उत्तराखंड में एमबीबीएस की फीस अभी केवल साढ़े सात लाख रुपये है। ऐसे में दूसरे राज्यों के होनहारों के लिए सस्ती मेडिकल शिक्षा की राह आसान है।
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