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कार्बेट पार्क में शिकारियों को देखते ही गोली मारने के आदेश

Wed, 22 Feb 2017 10:51 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Wed, 22 Feb 2017 10:51 AM IST
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order to shoot poachers on Corbett national park
कॉर्बेट नेशनल पार्क बारिश के दिनों में बंद कर दिया जाता है। - फोटो : file photo

जिम कार्बेट पार्क की सबसे संवेदनशील दक्षिण सीमा के पास शिकारियों (बावरिया) के मूवमेंट की सूचना पर वन विभाग ने शिकारियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं।

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डायरेक्टर कार्बेट के अनुसार मूवमेंट की इनफार्मेशनपर शिकारियों की धरपकड़ के लिए वन विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। संवेदनशील जगहों पर हथियारों से लैस वन कर्मियों को तैनात कर दिया गया है।
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मार्च 2016 में हरिद्वार के पास बाघ की पांच खालें बरामद हुई थीं। इन बाघों का शिकार कार्बेट पार्क में होने की बात सामने आई थी। जहां शिकार हुआ था, वहीं से शिकारियों के घुसने की आशंका बनी हुई है। वन विभाग को कार्बेट पार्क की दक्षिण सीमा और यूपी क्षेत्र में बावरिया गिरोह के मूवमेंट की सूचना मिली है।
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इसके बाद से ही महकमे में खलबली मची हुई है। वन विभाग की 150 वन कर्मियों की टीम ने मंगलवार से विशेष अभियान शुरू कर दिया है। इसमें कार्बेट पार्क निदेशक समेत उच्चाधिकारी भी शामिल हैं। वनाधिकारियों के अनुसार तीन सौ से ज्यादा कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।

कार्बेट पार्क के निदेशक डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि शिकारियों के घुसने की आशंका के मद्देनजर एहतियातन कदम उठाए गए हैं। संवेदनशील और ऊंचाई वाली की जगहों पर हथियारबंद वनकर्मियों को तैनात करने के साथ शिकारियों को देखते हुए गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। अगले पांच दिन तक विशेष अभियान चलेगा। ग्रामीणों को भी अभियान की सूचना दे दी गई है कि लकड़ी बीनने या मवेशियों को लेकर कार्बेट पार्क खासकर कोर जोन में तो कतई नहीं जाएं।

शासनादेश का हवाला
शिकारियों को देखते ही गोली मारने का आदेश देने के पीछे वर्ष 2003 में जारी शासनादेश का हवाला दे रहा है। इसके अनुसार वन, वन संपदा की रक्षा के लिए विशेष परिस्थितियों में गोली चलाई जा सकती है। इसमें वनकर्मी के खिलाफ तत्काल कोई एफआईआर दर्ज नहीं होगी। पहले मजिस्ट्रेटी जांच होगी, उसके बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।

खुलासे से ज्यादा मामलों को दबाने पर ध्यान
कार्बेट पार्क में शिकारियों की घुसपैठ होती रही है, लेकिन मामलों के खुलासे से ज्यादा उन्हें दबाने या घुमाने को लेकर पार्क के अधिकारी ज्यादा सक्रियता दिखाते हैं। वहीं, केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाली स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन आज तक नहीं हो सका है।

मई 2012 में शिकारियों ने कार्बेट पार्क में घुसकर बाघ को मार गिराया था। कार्बेट पार्क की टीम ने कड़के से लेकर मारे गए बाघों का मांस तक बरामद किया था, लेकिन तत्कालीन कार्बेट पार्क के अधिकारी मामले को दबाने में ही लगे रहे। मार्च 2016 में हरिद्वार के पास एसटीएफ ने बाघ की पांच खालें बरामद की थीं। उस समय संदेह था कि बाघों का शिकार कार्बेट पार्क में हुआ है, लेकिन कार्बेट पार्क समेत देहरादून में बैठे अधिकारी कैमरा ट्रैप की रिपोर्ट के आधार पर मारे गए बाघों को ‘अपना’ बताते रहे, लेकिन शिकार कार्बेट पार्क में हुआ है, उससे इनकार करते रहे।

बाद में कार्बेट पार्क में ही बाघों का शिकार होने और वन कर्मियों की लापरवाही की बात सामने आई थी। इससे पहले दिसंबर 2012 में कार्बेट पार्क से सटे अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में भी दो बाघों का शिकार हुआ था। इसमें 12 शिकारी पकड़े गए थे। कार्बेट पार्क में बाघों को बचाने के लिए लंबे समय से स्पेशल टाइगर प्रोटेेक्शन फोर्स बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। जबकि, इस फोर्स को केंद्र सरकार की नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी आर्थिक आदि मदद देगी।


गश्त के लिए हाथी लेने कर्नाटक पहुंचे अफसर
कार्बेट पार्क में गश्त आदि के लिए वन विभाग कर्नाटक से हाथी लेकर आएगा। इसके लिए कार्बेट उप निदेशक को कर्नाटक भेजा गया है। जंगल की कुछ जगह ऐसी हैं, जहां वाहन और पैदल गश्त करना मुश्किल होता है। ऐसे में बेहतर गश्त और सुरक्षा के मद्देनजर कार्बेट पार्क प्रबंधन ने कर्नाटक से हाथियों की मांग की है। उप निदेशक अमित वर्मा कहते हैं कि नौ हाथी मंगाए जा रहे हैं। इसके लिए करीब सभी औपचारिकता पूरी हो गई है। कर्नाटक में हाथियों के प्रशिक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, विभाग हाथियों के प्रशिक्षण के संबंध में भी जानकारी जुटा रहा है, जिससे बेहतर ढंग से कार्य हो सके।

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