{"_id":"6a7f72bc1d4f7abc9a0fb30e","slug":"order-to-release-car-seized-through-fraud-on-a-personal-bond-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1089-1042832-2026-08-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: जालसाजी से हड़पी गई कार 50 हजार रुपये के मुचलके पर छोड़ने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: जालसाजी से हड़पी गई कार 50 हजार रुपये के मुचलके पर छोड़ने के आदेश
Sat, 15 Aug 2026 01:25 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sat, 15 Aug 2026 01:25 AM IST
विज्ञापन
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) नंदन सिंह की अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में सहसपुर कोतवाली पुलिस की ओर से सीज की गई कार को रिलीज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने वाहन स्वामी की फौजदारी निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए 14 अगस्त को निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया। कार को 50 हजार रुपये के मुचलके पर इस सख्त शर्त के साथ छोड़ा गया है कि बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के इसे न तो बेचा जाएगा और न ही हस्तांतरित किया जाएगा। पंजाब के होशियारपुर जिले के काकोन निवासी अय्यूब हसन की कार को आरोपी अब्दुल वहाब और उसकी पत्नी लवप्रीत कौर ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपने नाम ट्रांसफर करा लिया था। बाद में आरोपियों ने यह कार किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी। शिकायत के बाद सहसपुर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कार को कब्जे में ले लिया था। मामले में 16 जुलाई 2026 की पुलिस रिपोर्ट और आरटीओ जालंधर के दस्तावेजों की जांच से फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। दरअसल, हस्तांतरण के कागजातों पर अय्यूब हसन के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे, जबकि बैंक दस्तावेजों में अय्यूब के अंगूठे के निशान थे। इससे साफ हो गया कि दस्तावेजों में कूटरचना की गई है। इस मामले में निचली अदालत ने चार अगस्त को पुलिस जांच लंबित होने का हवाला देते हुए वाहन रिलीज करने का आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद पीड़ित ने एडीजे कोर्ट की शरण ली। एडीजे अदालत ने पत्रावलियों का अवलोकन कर पाया कि मूल रूप से वाहन अय्यूब के नाम ही पंजीकृत है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सीज किए गए वाहन को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक थाने में खड़ा रखकर कबाड़ होने देना उचित नहीं है। इन्ही तथ्यों के आधार पर अदालत ने निगरानी याचिका स्वीकार कर कार उसके असली मालिक के सुपुर्द करने के आदेश जारी किए।
विज्ञापन