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उत्तराखंड में सिफारिशों का खेल, निकाय आचार संहिता के दौरान जारी हुआ इनकी नियुक्ति का आदेश

Wed, 05 Dec 2018 10:12 AM IST
राकेश खंडूरी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूरी, अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 05 Dec 2018 10:12 AM IST
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Order for appointment issued during uttarakhand nikay chunav 2018 code of conduct
शाहनवाज हुसैन - फोटो : amar ujala

हाजी राव शराफत अली की वक्फ बोर्ड में सदस्य पद पर वापसी पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। पिछले महीने उनकी ताजपोशी उस वक्त की गई, जब राज्य में निकाय चुनावों के चलते आचार संहिता प्रभावी थी।  अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इस बारे में 15 नवंबर को शासनादेश जारी किया था। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन की सिफारिश पर उन्हें उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का सदस्य बनाया गया है।  

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 उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2012 में भ्रष्टाचार के आरोप में अली को इसी वक्फ बोर्ड  के सदस्य पद से हटा दिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से भ्रष्टाचार के आरोपों से निजात मिल गई थी।  बावजूद इसके इस नियुक्ति पर तीन वजहों से सवाल उठ रहे हैं। पहला वक्फ बोर्ड अधिनियम के अनुसार बोर्ड से हटाए गए व्यक्ति को दोबारा सदस्य नहीं बनाया जा सकता है। इस नियुक्ति पर सवाल उठने की दूसरी वजह पद खाली न होने के बावजूद राव को सदस्य बनाया जाना है।
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सबसे अहम बात यह भी है कि इस बारे में आदेश राज्य में निकाय चुनाव की आचार संहिता प्रभावी रहने के दौरान शासनादेश जारी किया गया है। जानकार कहते हैं कि राव को बोर्ड का सदस्य बनाने के लिए नियमों को तोड़ा-मरोडा गया है। सूत्रों ने बताया कि राव के लिहाज से बोर्ड में कोई पद खाली नहीं था। ऐसे में पहले से सांसद कोटे से नियुक्त सदस्य मोहम्मद आसिफ मियां का कोटा बदलकर उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता की कैटेगरी में डाला गया। इसके बाद उनकी जगह हाजी राव शराफत अली को सांसद कोटे से सदस्य बना दिया गया। 
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मुझ पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं: राव शराफत  

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के सदस्य हाजी राव शराफत अली ने कहा कि उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। जिन आरोपों के आधार पर उन्हें हटाया गया था, उनके खिलाफ वे कोर्ट में गए थे। ट्रिब्यूनल ने सरकार के आदेश को खारिज कर दिया था। उसके बाद हाईकोर्ट से भी उनके पक्ष में फैसला आया था। चूंकि मुझ पर कोई आरोप नहीं है, तो मेरी बोर्ड में वापसी हो सकती है। पद खाली न होने के बावजूद सदस्य बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा करने का पूरा अधिकार है।

मैं राजनीतिक व्यक्ति हूं। मेरे पास कई लोग सिफारिश के लिए आते हैं। राव शराफत अली के लिए भी मैंने सिफारिश की होगी, लेकिन उन पर लगे आरोपों को देखने का काम सरकार का है।
-शाहनवाज हुसैन, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा

वक्फ बोर्ड के सदस्य बनाए जाने का मामला राजनीतिक होता है। जहां तक भ्रष्टाचार के मामले में सदस्य को पूर्व हटाए जाने का संबंध है, तो इस बारे में मैं जानकारी लूंगा।
- डॉ. रणवीर सिंह, अपर मुख्य सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग


वक्फ बोर्ड का सदस्य बनाए जाने का आदेश शासन ने किया है। इसलिए इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। जहां तक कोटा बदल कर सदस्य नामित करने का सवाल है, इस मामले में वक्फ बोर्ड 1995 पूरी तरह से मौन है।
-मोहम्मद अब्दुल अलीम अंसारी, सीईओ, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड

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