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लाल बत्ती पर सदन लाल, विपक्ष का वाक आउट

Fri, 11 Mar 2016 05:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Mar 2016 05:26 AM IST
सार

नियम 58 में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने कहा प्रदेश में अराजकता।
इस पर जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वाकआउट किया।
मदन कौशिक ने याद दिलाया सीएम द्वारा मुआवजे का एलान।

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opposition walk out from assembly.
सदन में जाते मुख्यमंत्री हरीश रावत। - फोटो : AmarUjala

विस्तार

शून्यकाल में विपक्ष सरकार पर हावी दिखा। तीन ऐसे अहम मुद्दे सामने रखे कि सरकार निरुत्तर हो गई। प्रश्नकाल शुरू होते ही जिस मुद्दे पर शोरशराबा शुरू हुआ, उसे नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने शून्यकाल में जारी रखा।

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प्रश्नकाल में तो स्पीकर के आश्वासन पर विपक्ष शांत हो गया, लेकिन शून्यकाल में स्पीकर की मंजूरी के बाद नियम 58 में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य सचिव के उस आदेश को सदन में रखा, जिसमें मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बगैर की कई दायित्वधारियों की नियुक्त हो गई। इसी मामले में मुख्य सचिव ने रिपोर्ट तलब की है। भट्ट ने पूछा कि क्या प्रदेश में दो मुख्यमंत्री हैं। यदि नहीं तो बगैर सीएम की अनुमति के नियुक्तियां कैसे हुई।
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इस पर संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्दयेश ने कहा कि मुख्य सचिव के पत्र का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। मीडिया में लगातार खबरें छप रही थी कि फर्जी लाल बत्ती वाली गाड़ियां पकड़ी जा रही हैं, जिस पर सीएस ने स्वत: संज्ञान लेकर प्रमुख सचिवों से जानकारी मांगी, जिससे अनियमितता की कोई गुंजाइश न रहे। आखिर कोई क्रास बैरियर तो होना ही चाहिए। सीएम और संसदीय कार्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वाकआउट किया तो सदन को तीन बजे तक स्थगित कर दिया गया।

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कौशिक ने खोली मंत्री के एलान की पोल

opposition walk out from assembly.
भाजपा व‌िधानमंडल दल के सदस्य। - फोटो : AmarUjala
शून्यकाल में भाजपा के मदन कौशिक ने सदन का ध्यान एक साल पहले सदन के भीतर गृहमंत्री की उस घोषणा की तरफ खींचा, जिसमें मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के गांव खेड़ाजट्ट में हुई दो भाइयों की हत्या के बाद पांच लाख रुपये मुआवजा देने का एलान किया गया था। कौशिक ने कहा कि एक साल बीतने को है, लेकिन अभी तक पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं मिला। यह विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।

सरकार बताए कि आखिर सदन के भीतर गृहमंत्री ने झूठी घोषणा क्यों की? कौशिक ने कहा कि प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी तक के मुआवजे से संबंधित पत्र होने के बावजूद पीड़ित को धनराशि क्यों नहीं मिली? मंत्री ऐसा आश्वासन सदन में क्यों देते हैं, जिन्हें पूरा करना उनके वश की बात नहीं है।

संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्दयेश ने हस्तक्षेप तो किया, लेकिन कौशिक उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुए। इसी बीच विधायक पुष्कर धामी ने खटीमा में भी एक पीड़ित को घोषणा के बावजूद पांच लाख का मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। मंत्री प्रीतम ने जवाब देने उठे तो विपक्ष और भड़क उठा। स्पीकर ने विपक्ष की विशेषाधिकार हनन की मांग पर बने दबाव पर निर्णय दिया कि सरकार सुनिश्चित करें कि विस का यह सत्र समाप्त होने से पहले निर्णय करें। कौशिक ने निर्णय को स्पष्ट करने की मांग की तो संसदीय कार्यमंत्री को कहना पड़ा कि सत्र समाप्ति से पहले मुआवजा दे दिया जाएगा।

राष्ट्रपति का संबोधन बना मुद्दा

opposition walk out from assembly.
सदन के बाहर गैलरी व‌िधायकों का हंगामा चलता रहा। - फोटो : AmarUjala

भाजपा के मदन कौशिक ने सदन के कार्यसंचालन को लेकर सवाल खड़ा किया। कौशिक ने मई 2015 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के विधानसभा संबोधन को सदन की कार्यवाही में शामिल करने को संचालन नियमावली का उल्लंघन करार दिया।

कौशिक ने कहा कि नियमों में प्रावधान है कि अध्यक्ष की पद की शपथ लिए बगैर कोई सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकता। राष्ट्रपति को सदन में बैठने और संबोधन का अधिकार तो है, लेकिन उनका संबोधन कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनेगा। जबकि विधानसभा ने राष्ट्रपति की अध्यक्षता में सदन के जुटने और संबोधन को कार्यसूची का हिस्सा बना दिया, जिसे बाहर किया जाना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल कौशिक के तर्क और नियमों का कटाक्ष नहीं कर पाए। इस पर आगे चर्चा पर विराम लगाते हुए अध्यक्ष ने कहा कि सदस्य मदन कौशिक के उठाए मुद्दे पर अपना निर्णय सुरक्षित रखता हूं।

पटल पर रखे गए ये विधेयक 
- उत्तराखंड विनियोग (2015-16 का प्रथम अनुपूरक) विधेयक
- उत्तराखंड चलचित्र (विनियमन) (संशोधन) विधेयक
- उत्तराखंड मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक
- उत्तराखंड माल के स्थानीय क्षेत्रों में प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक
- उत्तराखंड उपकर विधेयक
- उत्तराखंड औद्योगिक विवाद (संशोधन) विधेयक
- उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा (संशोधन) विधेयक
- उत्तराखंड राज्य विधानसभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) विधेयक
- उत्तराखंड आमोद और पणकर (द्वितीय संशोधन) विधेयक

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