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भ्रष्टाचार पर प्रहार, दावे, सियासत और एतबार, जानिए विस सत्र में सरकार और विपक्ष की हॉट टॉक

Mon, 27 Mar 2017 09:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 27 Mar 2017 09:01 PM IST
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Opposition raised issue of corruption in the assembly
- फोटो : amarujala

चौथी विधानसभा के पहले सत्र में भ्रष्टाचार का मुद्दा रह रहकर उभर रहा है। त्रिवेंद्र सरकार की भ्रष्टाचार पर प्रहार की प्रतिबद्घता ने इस मुद्दे को तूल दे दिया है। ये ही वजह है कि बात चाहे जो हो रही हो, लेकिन घूम फिरकर भ्रष्टाचार का मुद्दा उसके केंद्र में आ रहा है।

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भ्रष्टाचार से लड़ाई में दावे हैं, प्रति दावे हैं। सियासत के रंग भी हैं। एतबार है, उस पर सवाल भी है। इन स्थितियों के बीच, सरकार ने एलान किया है कि भ्रष्टाचार किसी भी तरह का क्यों न हो, उस पर जीरो टॉलरेंस की नीति रहेगी। 
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अवैध खनन के मामले में भी जीरो टॉलरेंस रहेगा। वहीं, भ्रष्टाचार पर विपक्ष भी ये भरोसा दिलाने से नहीं चूका है कि वह इसके खिलाफ हर कार्रवाई में साथ है। सदन के भीतर चाहे वो प्रश्नकाल रहा हो या फिर राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का मामला, भ्रष्टाचार का विषय कई बार सामने आया। ट्रेजरी बैंच और विपक्ष के बीच इस मामले में एक-दूसरे पर खूब हमले किए गए। दावों की खिल्ली भी उड़ाई गई।

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सफेदपोशों का जिक्र, किसकी ओर इशारा

Opposition raised issue of corruption in the assembly

हमारी सरकार ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामले में हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति होगी। अवैध खनन के मामले में भी जीरो टॉलरेंस होगा। बीजेपी ने भय और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वायदा किया है। इसी अनुरूप काम किया जाएगा।
-प्रकाश पंत, संसदीय कार्य मंत्री

भ्रष्टाचार के मामले में कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसके साथ कार्रवाई में हम सरकार के साथ है। किसी को मत छोड़िए। मगर ये भी ध्यान रखना होगा, कि भ्रष्टाचार पर वास्तव में ठोस कार्रवाई हो। सिर्फ स्लोगन देने से नैया पार नहीं होगी। 
-डा. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष

सफेदपोशों का जिक्र, किसकी ओर इशारा

अवैध खनन और भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में चर्चा के दौरान सोमवार को बार-बार सफेदपोशों का जिक्र आया। विपक्ष ने बार-बार ये इशारा किया कि सफेदपोशों के संरक्षण से ही भ्रष्टाचारियों के हौंसले बुलंद है। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश से लेकर पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, करण माहरा तक ने अपने वक्तव्य में सफेदपोशों का जिक्र किया। जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि सफेदपोशों की संलिप्तता वाली बात से वह सहमत है। सरकार ऐसे मामलों में बगैर किसी दबाव के ठोस काम करेगी।

...तो सीबीआई पर हरदा का एतबार नहीं

Opposition raised issue of corruption in the assembly


एनएच घोटाले पर सीबीआई जांच का स्वागत करने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत ने अब इसके साथ एक सुझाव जोड़ दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में सीबीआई से जांच कराने का सुझाव रखा है। उन्होंने कहा है कि देखरेख कोर्ट की हो और काम सीबीआई करे।

इतनी सारी बातें कहते हुए भी पूर्व सीएम यह मानने को तैयार नहीं हुए कि वह सीबीआई पर अविश्वास कर रहे हैं। राज्य बनने हुए सारे घपले-घोटालों की कोर्ट के सिटिंग जज से जांच की बात को उन्होंने दोहराया। उनकी इस बात को सदन के भीतर पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने आगे बढ़ाया। विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए सोमवार को पूर्व सीएम हरीश रावत एक दर्शक के तौर पर मौजूद रहे।

बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर यदि सरकार ईमानदार है, तो वह पुराना बैकलॉग खत्म करे। सारे घपले-घोटालों की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा-2014 में मैने जब काम संभाला, तब से लेकर निवर्तमान सीएम रहने तक जो भी फैसले हुए हैं, उसकी पहली जिम्मेदारी मेरी है। अफसरों की जिम्मेदारी बाद में है।

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