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इन बच्चों के चेहरों पर कब खिलेगी ‘मुस्कान’

Thu, 22 Jan 2015 05:01 PM IST
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Thu, 22 Jan 2015 05:01 PM IST
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operation smile in almora.

ऑपरेशन स्माइल के जरिए पुलिस ने घरों से भटके कई बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचा दिया, लेकिन राजकीय शिशु सदन अल्मोड़ा में तीन मासूम ऐसे भी हैं जिनका कोई अता-पता नहीं।

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लालकुआं में भटकता मिला था समीर
इनमें शिवानी पिछले साल रामनगर में मिली। गौरव तीन साल पहले हल्द्वानी में और समीर लालकुआं में भटकता मिला था। जब यह तीनों बच्चे घर से भटके थे तब इन सबकी उम्र पांच साल के करीब थी और वह अपना पता नहीं बता सके। आज तक उनके घर और माता-पिता का पता नहीं लग सका है।
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अल्मोड़ा पुलिस के प्रयास से एक सप्ताह के भीतर राजकीय शिशु सदन में पल रहे दो बच्चे अपने घर पहुंच गए हैं। आपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस ने इन बच्चों के फोटो पूरे राज्य में सर्कुलेट किए जिससे बच्चों के माता-पिता ने उन्हें पहचान लिया। राजकीय शिशु सदन में तीन और ऐसे बच्चे पल रहे हैं जिनके माता-पिता और घरों के बारे में आज तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
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इनमें अब छह साल की हो चुकी शिवानी 30 जून 2014 को रामनगर रेलवे स्टेशन पर भटकती मिली थी। वह अपने पिता का नाम परमजीत और माता का नाम रेशमा बताती है, लेकिन घर का पता नहीं बता सकी। वह पठानकोट का नाम लेती है, लेकिन आज तक माता-पिता के बारे में पता नहीं चल सका। उसे चाइल्ड लाइन नैनीताल के माध्यम से दो जुलाई 2014 को शिशु सदन में दाखिला दिया गया।

दूसरा बच्चा समीर दो मई 2011 को लालकुआं में लावारिस मिला था। तब वह पांच साल का था। उसने अपने पिता का नाम अवतार और माता का नाम मीनू बताया लेकिन घर का पता आदि नहीं बता सका। समझा जाता है कि वह ट्रेन से लालकुआं पहुंच गया होगा।

एसडीएम के आदेश के बाद उसे तीन मई 2011 को राजकीय शिशु सदन अल्मोड़ा भेजा गया। एक अन्य बच्चा गौरव दो अगस्त 2011 को हल्द्वानी मंडी क्षेत्र में घूमता मिला। तब उसकी उम्र भी पांच साल थी। वह अपने पिता का नाम निरंजन बताता है। इसके अलावा कुछ नहीं बता सका। उसे भी 27 अगस्त 2011 को राजकीय शिशु सदन में लाया गया।

घर से भटके तीनों बच्चे काफी उदास रहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि कभी न कभी उनके माता-पिता को उनके  बारे में पता लग जाएगा और वह अपने घर लौट सकेंगे।

इन तीन बच्चों को गोद भी नहीं दिया जा सकता

अल्मोड़ा। राजकीय शिशु सदन की प्रभारी अधीक्षिका सुशीला देवी के मुताबिक नियमानुसार इन तीन बच्चों को किसी को गोद भी नहीं दिया जा सकता, क्योंकि कब इनके परिजन आ जाएं, कहा नहीं जा सकता।

उन्होंने बताया कि शिशु सदन में वर्तमान में 10 साल की उम्र तक के 26 बच्चे पल रहे हैं। इन तीनों के अलावा अन्य बच्चे मां-बाप की मृत्यु के कारण लावारिस होने, माता-पिता के जेल में होने और अन्य कारणों से यहां रखे गए हैं।


गोद देने की श्रेणी में एक तीन माह का बच्चा है, जिसे गोद देने की प्रक्रिया चल रही है। इन बच्चों की देखभाल में प्रभारी अधीक्षिका के अलावा नर्स मीना जोशी और अन्य स्टाफ का अच्छा योगदान रहता है।

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